Saturday, July 18, 2020

Phir Yeh Raat Akelii...

कैसे कहूँ कैसे कटी रातें 
                       .........दिन निकला सुबह हुई 
    ........फिर हुई यादों की बरसातें 
सूखे से है दिन..... 
                     .......सूखी लगे शामे
सूखी - सूखी सी है..... ख़्वाब में भीगी रातें 
     बेचैन हुई रात फ़िर..... 
          .........सूरज से लगाई गुहार कई   
दूर कैसे रहें अँधेरों से है इसे प्यार भी
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली.....
    .........छुपकर किरणों से फ़िर बनने मेरी सहेली
💫        💫           💫             💫
कुछ अपनी कहूँ..... 
          .........कुछ इसकी सुनूँ 
इक पल को भी संग इसके......चुप न रहूँ 
जो नीभ न पाई...... 
         ........उन वादों की देने दुहाई
लो इसी बहाने रात...... 
            ........फिर मुझसे मिलने आई  
💕        💕           💕              💕
सोचा कई बार.......छोड़ दूँ इसका भी साथ 
फिर याद आई.......  
          .........बीती रात जो थी वीरानी
गुज़रे पल थे ऐसे...... खड़ी सुनी हवेली जैसे
हर मोड़ मिली...... 
          .......पर जो न सुलझी वो तू पहेली  
बीतें दिनों की ठहरी 
            ........ तू ही मात्र सहेली 
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली.....
💗          💗           💗            💗
गुज़री हर लम्हें मैं.......... 
          .........पर रहा रुका साया इंतज़ार में
कहने को इक बूँद न गिरी......  
  .........फिर भी भीगी हूँ इश्क़ की बरसात में  
न जाने दिल की कही.......  
                .......सच कब कैसे होगी
मद्धम चाँद और तारों को कब......
              ........नसीब अपनी रौशनी होगी
अंजाना सा डर है मुझे.......
   ........फिर भी चाहूँ दिल से दुआ दे तू मुझे
याद शहर से संग आई.......
               ........ तू ही बची एक करीबी है 
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली......

    

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