Thursday, February 27, 2020

Badal Gayi Rajneeti...


नदामतों के चिराग़ रौशन होते हि......

.... इबादत में हाथ उठते है !!

खुदा का मर्म पाते हि अश्क़..... फ़ना हो कहते है !!

करनी है दुश्मनी तो...... अँधेरों से कर !

किरण तो रौशनी के..... छुपे शस्त्र होते है !!

सत्य से संघर्ष तो..... निरंतर जारी हैं !

आज फिर से अँधेरों ने हमें..... चुनौती दे मारी हैं !!

मन की परतें खोल...... औरों से न सही,

खुद से....सत्य तो बोल.......,

हम निहत्थे शत्रु कब तक..... टिकेंगे इस अखाड़े में,

धूल उड़ेंगे राजधानी में और...... कब तक 

 राम - रहीम कटकर मरघट जायेंगे  !!

तूफ़ां का तेवर देख.....नेताओं की नीति बदल गयी  !

आज नए भारत में...... राजनीती बदल गयी  !!

Tuesday, February 25, 2020

Zindgi ki tijoriiii...


समेटा बहुत कुछ...... ज़िंदगी की तिज़ोरी में,

आजकल फ़ुर्सत में....संग वक़्त के.....लुटते देखती हूँ !!

हर शह में आज....... महफ़िल लगी !

मुनाफ़ा कम था.....सो नाक़ाम.....मंज़र पे बात चली !!

गुलक यादों के......कितने ख़ुद तोड़ दिए !

अपनें कई रिश्तें ग़ैरों के........ दहलीज़ छोड़ दिए !!

तेज बयार के झोकें.... हक़ीक़त से रूबरू कराते है जब !

हसरतों के हुज़ूम भी.......ख़ामोश बैठ , 


फ़क़त का जश्न..... ख़ुद हि मनाते हैं तब  !!

श्रेष्ठ का प्रमाण..... महफ़ूज़ है तिजोरी में..... इलम हुआ,

परख़ने बैठी जो..... नज़रों से भीड़ भरी...... बाज़ार में !!

आज भी लगता है...... अमीर हूँ...... इस जहां में !

तोड़ ताले..... अक्सर घुसते है...... जब मेरे मकाँ में !!

छत पर पड़ा.....खाली मर्तबान..... बयां करता मेरा क़िस्सा हैं !

क्या कहूँ कि आज मैं....... खुली तिज़ोरी का हिस्सा हूँ !!



Monday, February 24, 2020

Bezubaan zindgiii....


कभी - कभी लगती बेमतलब ,बेबस......                                                                  .......बेज़ान सी ज़िंदगी  !!
    
पल - पल लगे काँटों का ......                                     
                            .......दस्तरख़ान है ज़िंदगी  !!


सदियों से जिये जा रहे बेमक़सद से .......                                                            .......बेबाक़ सी ज़िंदगी  !!
  
रहम की उम्मीद किससे करू अपनों से हि......                                                         .......बेज़ार है ज़िंदगी  !!

तेज़ झोंका नहीं कभी एक शक़ कि फूँक से हि......                                                    ......बिख़र जाती है ज़िंदगी  !!
   
मिली नहीं सदा के लिए तू फिर क्यों हर लम्हें ......                                                       
                                   ......तन्हाँ कर गई ज़िंदगी !!

धूप भी मायूस पड़ा छत पर किसी बहाने संग ......  
                           .....मुस्कुराया कर ज़िंदगी  !!
   
होने न दे हौसले का तरकश खाली उम्मीद के तीर से.....
                                                      .......भरी है ज़िंदगी  !!

चेहरें से कितनों के उठने नक़ाब बाकि है कहता हर पैमाना.......
                                             .......अभी हिसाब बाकि है ज़िंदगी  !!

Saturday, February 22, 2020

O kanha...


ओ  कान्हा.......,


जानें क्या सूझी तुझको....प्रीत क्यों जगाई मुझको,


तू भी तो तरपा होगा..... राधे दर्शन को तरसा होगा !


मन बनाकर.....कई दफ़े ख़ुद पर बरसा होगा !!


देख छवि आँखों में तेरी....छलके आँसू पलकों से मेरी,


सुध - बुध सबने खोई...... सुन बाँसुरी की धुन तेरी !!


राधा तेरी जया है .....मीरा अदभुत माया की काया है,


जोगन से जग करे सवाल ..... बता तेरा जहां में कौन है ?


मुस्कुरा कर आज भी ...... कुंज बिहारी खड़े क्यों मौन हैं !!


जग से न अब आशा है.....बदल गयी प्रेम की परिभाषा है,


देखो तो लगता है...... हर तरफ़ चारों धाम लगे हैं ! 


श्याम दिल में नहीं..... ईट की दीवारों में क़ैद घनश्याम पड़े है !!

Friday, February 21, 2020

Hosla rakh.....


चल पड़े हो जिस सफर पर....... क़ायम तू..... हौसला रख,

राहों में कहीं सहरा.....कहीं पे समंदर भी आयेंगे, 

कभी न कभी लहरें तुम्हें.....साहिल पर छोड़ जायेंगे !!

खुले आसमां से.....तू डर मत.....पर् तो मिले है तुझे, 

उड़ान को ऊंची..... साहस भी आ जायेंगे !!

पेड़ है....पतझड़ तो आएंगे....रिश्तें है तो कुछ

सर इल्ज़ाम भी लायेंगे.....संयम संग चले तो सब 

निपट जायेंगे !!

मंज़िल की प्यास न छोड़...... होड़ में तू न दौड़, 

आज है जो थमा थमा सा.... कल की बारिश में 

चल निकलेगा वो  !! 

रूप - रंग नहीं..... अपनी सोच की थोड़ी चाल 

बदल......मिजाज़ ख़ुद बदल जायेंगे ,

मरहम का पता हो तो......ज़ख़्म भी सूख जायेंगे  !!



Wednesday, February 19, 2020

Woh mein thiii...



बिन कुछ कहे...... सब कुछ सहे !

लफ्जों की महफ़िल में जो  💬💬💬

कहते - कहते रह गए ..... वो मैं थी !!



गुज़ार दिए..... कई दिन,महीनें और साल  🙇🙇🙇

जो कट ना सकी रात ...... वो मैं थी !!



मुद्द्ते बीती...... सुहाने ख़्वाब देखें  👀👀👀

सोती रातों में जगा बिस्तर जो रस्ता रोकें .....वो मैं थी !!  



तेरी ज़मीं पर...... कितने आसमान रहे  💥💥💥

ख़्वाबों की फ़सल जो उगा न सकें .... वो मैं थी !!



भीड़ में तन्हाँ..... ख़ुदको जब भी तुमने पाया  💕💕💕

अपनेपन का एहसास जो संग लाया ..... वो मैं थी !! 



मिलते नहीं है अक्स मेरे.... अपनी ही कहानी में  😔😔😔

दास्ताँ तो लिखी तेरी पर ग़ायब  है जिसके निशाँ ...... वो मैं थी !! 


अफ़वाह से तबियत..... तेरी ख़राब थी !

पूछ - पूछ लोगों ने कर दी खड़ी दीवार थी  💔💔💔

सज़ा -ए -इश्क़ कि क्या अकेली ...... मैं ही हक़दार थी  !!



Thursday, February 13, 2020

Yaadon ki almari....


मेरी अलमारी में रखें है.... कुछ कोरे पन्ने !

कैद है जिसमें मुफ़लिसी में देखें..... कई सपनें 💝💝

वहीं पास पड़ा हैं,..... एक डायरी अपना !

ऊपर लिखा था जिसके,....."एक सपना "

अल्फ़ाज़ों में छिपी बैठी ..... सीने की तपिश जहाँ !

बन गयी है आज......ख़लिश की निशानी यहाँ 💗💗

बिसरी रातें,......तेरी पनाह में बीती ....यादें हैं कुछ !

आँखों के पन्ने पलटनें......अक़सर आते हैं सचमूच 💑💑

इक सूखा पत्ता,....पन्ने की ओट लिए पड़ा हैं.....तेरा मेरा नाम जिसमें जड़ा है !

चल तो रही है,...साँसें रेस की तरह.....पर धड़कनें,.....दिल रोके खड़ा है 💕💕

चुराया हर लम्हा,.... दर्ज़ है अश्कों की श्याही से !

कतरन भी बचे है कुछ अरमानों के,.....जो गिरी है घुन लगी दीवारों से 💘💘

देखो तो वक़्त ए इश्क़ ने,.... क्या क्या बदल दिया !

इश्क़ वफ़ा के खेल में......दिल को Almari बदल दिया 💓💓💓

Saturday, February 08, 2020

Dil dhundta haiii...

दिल ढूँढ़ता है..... फ़िर वहीं फ़ुरसत के चार पल !!

बीता जो किसी के तसव्वूर में, हाथों में हाथ लिए,

अरमानों के मेले में..... बिके अल्फ़ाज़ लिए 💘💘💘

दिल ढूँढ़ता है..... फ़िर वहीं हाल ए दिल बयां !!

करती नज़रे जो आईना बन..... सूरत लिए मेरी, 

बैठें रहे छाँव में तेरी.....पलकों में इंतज़ार लिए 💖💖💖

दिल ढूँढ़ता है..... फिर वहीं मुक़मल मुलाक़ात !!

गैरों की नज़रों से छिप..... सूरज की ओट में,

खुले मैदानों के बीच  jaana...... संग एक दूजे का लिए 💓💓💓

दिल ढूँढ़ता है..... फ़िर वहीं हक़ इबादत का !! 

उठे रूह से दुआ बन रब की, पहुँचे तुझ तक भी  sadaa जिसकी,

बेवज़ह होता नहीं कुछ, देखूँ जब....... अपने हथेलियों को लकीरें तेरी लिए 💕💕💕


Thursday, February 06, 2020

O ri....pawan...



ओ री पवन.........चूम के गगन, 

करती तू अटखेली क्यों है......., 

साँझ की चादर बिछी सड़कों से भोर तक,

नदी की धार सी.......तू मचलती क्यों है....., 

सूखे मैदानों में, लेटे बेज़ान पत्थरों से, 

तू जा - जा बतियातीं क्यों है........,  

छाई मौसम की घटा, रोशन हुआ हर दिशा, 

हर रुत की......तू लगती सहेली क्यों है......,  

नींद भरी पलकों से, छटा यादों का पहरा,  

अरमानों का झूला.......तू झुलाती क्यों है....,

यादों की गठरी बना, छोड़ आयी जिस दहलीज़,

संग -संग अपने,.....तू अहसास वो लाती क्यों है....,

इन्सां के पीर में, खंडहर सि हृदय में ,

गूंगी हि सही पर......तू गुण -गुणाती क्यों है.....,

कर्म का पेड़ लगा, हाथ जोड़ जब माँगी दुआ,

पेड़ - पौधे, जीव - जंतु, सबके लिए.......तू है क्यों अनमोल दवा !! 


Tuesday, February 04, 2020

Tanhaii....



बेचैनी है...... ख़ामोशी भी छाई है !

आज फिर वो..... तन्हाँ रात आयी है !!

उन रातों का जब भी ज़िक्र होता है........  

भींगे लमहों को आँखों में..........  
                              
                  ...... पिघलने और बिखरने का फ़िक्र होता है !!

तन्हाई के हर हिस्से में......छिपे जज़्बातों के कई किस्से हैं !!

आज कोरे पन्नों में.......  

नया क़िस्सा शामिल कर लिया......सुकून से ख़ुद को महफ़ूज़ कर लिया !!

अंगराई लेती जब भी तन्हाँ रात...... हर करवट में दिलाती वही याद !!

सफ़र रुसवाई का हि सही .......बेहतर था चार पल का साथ !!  

लो आ गई घूँघट डाल फ़िर सामने तन्हाई.........   

                                                ...... करनी है जिसकी फिर से मुँह दिखाई !!




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