Monday, June 29, 2020

Dard Ka Sahar....

क़दमों के फासले से बंदिशों के दायरे कम किये
पीछा किया ताउम्र अनकहे लफ्जों का
जाने कब वो किसी और के हो लिए !!

आसां न था जाना उधर मालूम हो ये है "दर्द का शहर"

टूट कर उलझी वादों में रिश्तों की डोरी, 
सूखे जख़्म में सिर्फ़ जलन थी भरी,
ख़्वाब में अकसर दिखें छिपे काले साये, 
गहरे सन्नाटे उसे और करीब लाए !!

इक टुकड़ा बन आज भी सीने में वो नम सा है,
तेरा ग़म जो लगता कभी - कभी मरहम सा है, 
आदतन सोचूँ यू होता तो अच्छा होता,
गर आँखों से ही शख़्स कतल होता !!

पूछा कई दफा बेमन सजी इन आँखों से, 
सोचो तो क्या थे और क्या हो गए हम,
कहाँ खो गए राही तुम रफ़्ता - रफ़्ता,
पढ़ लेते थे बिन कहे ख़ामोशी भी तुम, 
दुनियाँ की दौड़ में चलना भूल गए आहिस्ता आहिस्ता तुम !!

इरादे है फिर से जीने के.........ज़िंदगी ढूँढ तू मुझे लेना,
इक बार फिर अपनी पनाह में रखना,
इस बार सिर्फ मेरे लिए आना !!

Wednesday, June 24, 2020

Phir Subah Hogiii...

माना राहें है पुरख़तर नहीं
और न रहीं आसान ज़िंदगी........
बैठे क्यों गुमसुम हो,करके बंद खिड़की सभी
गुज़रे वक़्त है बहुत,पर याद में ज़िंदा लम्हा नहीं 
शाम ढलती तो रोज़ है,पर सुबह मेरी होती नहीं !!

नभ में तारें पिघल - पिघल

रोशन करें आसमां का जहां........
लगा ग्रहण है सूरज को,फिर क्यों झुलस रही जमीं
उभर आए कितने दिनकर,बनकर कवि अभी
सोए है रस्तें फ़िर भी ऐसे,जैसे धूप मयस्सर हुई नहीं !!

तपते मरू पर चलते - चलते

नापी है हौसलों से सरजमीं.........
कहते है सोहबत से,शख्सियत निखरती है भली 
सूखे पड़े साख़ से,ऐज़ाज़ के फल तोड़ा है कभी 
जमी हो जहाँ बरसों की धूल,वहाँ बारिश भी ठहरती नहीं !!

सपनों को अपने मोहलत दो 

पल जो है पराये वो है गुजरने को.......... 
लेने दे कड़ा इम्तिहान,कर ऊँचा तू इरादों की उड़ान   
लाख शातिर मंसूबे रखें,चाहें कोई कितना ही सही
ढली शाम है आख़िर,फ़िर सुबह होगी ही कहीं !!

Wednesday, June 17, 2020

Yeh Raat.....

कितना गहरा अँधेरा उभरा 
सुनहरी शाम ढली नज़र आया 
फ़िर मन का सूना कमरा 
सूखे - सूखे जज़्बात
अधूरे बंद पड़े ख़्वाब
तन्हाई की चादर ओढे 
पल - पल सरकती ये रात..........

क़तार लंबी है Shelf पर रखें किताबों की
कमी नहीं जिसमें अल्फ़ाज़ों की 
टूटे रिश्तें जोड़ू कैसे ?
अपने सपने पहचानों ऐसे !
भरे पड़े है पन्ने ऐसे कई जवाबों से
सुकूँ कहाँ लेकिन स्याही के 
इस ताने बाने से  
पल - पल समझाती ये रात..........

शिकायती नज़रों की फ़ेरिश्त से
ख़ुदको दूर रख चार लम्हें 
अपनों पर भी बर्बाद कर 
छिपे सवाल जो है तेरे उसे ज़ाहिर कर 
ज़ियादा की तवक़्क़ो नहीं 
बस आबो -ओ- दाना का ख्याल कर
पल - पल सिखाती ये रात...........

कहते है चंद दिनों का ये सफ़र 
बसते है मकां में चंद लोग 
भरोसा न कर ज़िंदगी का  
मरने लगे है इक दूसरे की वफ़ा में लोग 
दिलचस्प बात है ख़ता करके 
दिखाते ख़ुदको कैसे शर्मिंदा है ये लोग    
पल - पल कहती ये रात.......... 
  

Thursday, June 11, 2020

Safar....

ताउम्र मैं इक अजनबी साये से डरा
न चाहा फिर भी नज़र के दायरों में रहा !!

बेज़ान शरीर लिये भटका किया शहर - शहर
सोयी रही चौख़ट तेरी रूह से बंधा में रहा !!


इश्क़ नाम का परिंदा लिए आया दिल तेरे शहर
पर् रखा जमीं पर ख़्वाब आसमां में रहा !!


कुछ अक्स चुभने लगे ख़ुश्क पत्ते की तरह
ज़िंदगी भर दिल जिसकी बाग़वानी में रहा !!


चाँद की सोहबत में आज तारें भी रूठ गए
हो गया ख़ामोश मैं जहां अपनी चमक में रहा !!


गर्दिशें हालात थी या फिसला मेरा नसीब था
हर मोड़ अश्क गिरे फिर भी सूखा आँगन में रहा !!


वो जिस्म ही था जो लूट गया तुझे कमाने में
हृदये तो हमेशा तेरी अंजान चाहत में रहा !! 

Wednesday, June 03, 2020

Yaadon ki baarish.....


यादों की बारिश में......,
भीगा मन लगा है करने फरमाईशें,
बढ़ रहीं मुसलसल इसकी ख़्वाहिशें,
कुछ धुंधले चेहरे बन सवर आए जो थे सिर्फ़ ख्यालों में,

दुनियाँ के इस मजमें में माना तन्हा हर कोना है,
मयकदों से भरा यूहीं नहीं मयखाना है,
जरुरी नहीं हर तराना हो मुक़म्मिल jaana,
आसमां भी लगा यहाँ आधे चाँद की नुमाईश में,

रास न आया कभी तेरे रूह से महरूम होना मुझे,
पाने - खोने के ग़म से पल में उभरना मुझे,
भीगती है आज भी पलकें सर्द पड़े इश्क़ की जुदाई में,

तन्हा पड़ा रहा वजूद दाग़ -ए- उल्फ़त की खाई में,
सोचा रखूँगा मेहफ़ूज़ इसे सुनहरी याद की तरह,
बेसबब हुए चूर - चूर वक़्त की साज़िश में,

मुश्किल रहा पुरानी यादों का सफ़र,
ग़म जो सोया नहीं बताए कोई उसे जगाए किस तरह,
लब हो गए है ख़ामोश अल्फाज़ों की आज़माईश में,

यादों की बारिश में भीग....अकसर ख़ुद से दूर हुए..........  
तेरे इश्क़ की बेरोज़गारी से......फ़िर हम मशहूर हुए..........   


     
  

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