Friday, June 05, 2026

Woh Saaj Hi Nahi Haiii...,

लिखने को आज अल्फ़ाज़ ही नहीं हैं,
तेरे ख्यालों में गुम हूँ कुछ इस तरह मैं,
गा तो रही हूँ आज भी पर वो साज़ ही नहीं है !!
💕
खुली किताब सा रखा था दिल ने तुझे,
जिसमें बसी थी तुम्हरी हर अदा,  
पढ़ रही हूँ आज भी पर वो अंदाज़ ही नहीं है !!
💕
महफ़िल तो रोज़ लगती है तारों की,
फ़लक पर चाँद भी बिखेरता है चाँदनी,
निहारती आज भी हूँ पर वो नाज़ ही नहीं है !!
💕
तेरे जाने के बाद कुछ यूँ बदली हूँ मैं, 
यकीं नहीं आईने को भी लोगों के बीच, 
हँस तो रही हूँ पर वो आवाज़ ही नहीं है !!
💕
धड़कनें चल रही है साँसें भी बाकि है,
शायद तेरे बिना एहसास ही नहीं,
जी तो रही हूँ पर जीने का आग़ाज़ ही नहीं है !!
💕
आज लिखने को अल्फ़ाज़ ही नहीं है,
जो कभी तेरे नाम से शुरू होती थी,
अब पास न कोई अंत, कोई परवाज़ ही नहीं है !!
💔
              तेरे सिवा अब आता कोई ख़्वाब ही नहीं  !
              तुझे भूल जाने का अब कोई सवाल ही नहीं !!
 
 

Saturday, May 30, 2026

Yuhi Tu Sang Rahna.....,

दुआ के साथ अज़ान, 
सुर के साथ जैसे तान, 
काज़ल की तरह तू आँखों में सजना, 
यूँ ही तू संग रहना......,
 
छू कर मन को दिल में उतरना, 
बारिश की पहली बूँद सा लगना, 
दुनियाँ की भीड़ में बस तू मेरा होना, 
यूँ ही तू संग रहना.......,
❤❤ 
बन के ग़ज़ल मेरी बातों में बसना, 
चाँद की चुप सी रोशिनी बन, 
मेरी रातों में बिखरना, 
यूँ ही तू संग रहना......,
❤💗❤ 
लबों पे हल्की सी हँसी रखना, 
बाँहों में थोड़ा सा जहां सजना, 
कभी जो ख़ामोश हो जाऊ, 
बिन कहे तू समझ लेना, 
यूँ ही तू संग रहना......,
❤💕❤
न बड़े वादे न शोर मोहब्बत का करना, 
छोटी छोटी बातों में यूँ प्यार रखना, 
जैसे आँसू को आँखें संभाले सजना,
यूँ ही तू संग रहना......,
💕💓💕 
लिखूँ तुझे रोज़ाना जैसे इबादत पुरानी, 
तेरा साथ लगे जैसे रूह की कहानी, 
तेरे बगैर कुछ और अब न कहना सुनना, 
उम्र भर यूँ ही तू संग रहना......, 
💑💝💑

Thursday, May 28, 2026

Bhishma : Pratigya Ka Shraap...,

भीष्म.......,
खुद में ही एक गाथा महाभारत की,
एक किरदार ऐसा जो अपने शब्दों से बंधा, 
जिम्मेदारी की जंजीर से जकड़ा, 
ऐसा योद्धा, प्रतिज्ञा बनी जिसकी पहचान, 
भारतवंशी के वो थे शान,
हस्तिनापुर में थी बसी उनकी जान,
और चाह कर भी जो रख न सके,
अपने पूर्वजों का मान,
इच्छा मृत्यु जो लगती है वरदान,
पर इनके लिए पल - पल थी विषपान,

धर्म जानते थे, सत्य पहचानते थे,
न चाहकर भी,अन्याय के संग पड़े रहे, 
राजसिहांसन की मर्यादा में, हाथ बाँधे खड़े रहे,  
एक वचन को जीना आसान नहीं, 
क्योंकि हर प्रतिज्ञा होती वरदान नहीं,

कुरुक्षेत्र में जितना रक़्त बहा, उतना दर्द अंदर सहा, 
गिरते हुए अपनों के साथ, टूटी इनकी भी आस, 
हार कर भी पराजित नहीं और जीतकर भी विजेता नहीं, 
भीष्म केवल एक योद्धा नहीं, 
त्याग और पीड़ा की अमर व्यथा थे, 
जो तीर की शैय्या पर लेटा शरीर नहीं, 
एक युग का टूटा अभिमान थे,
 
जीवनभर जिसने सबका भार उठाया, 
अंत में सिर्फ अकेलापन उनके हाथ आया, 
ये उन फैसलों का हिसाब था, 
जो कर्तव्यों के नाम पर लिया खुद के खिलाफ था,
 
महाभारत ख़त्म हो गई, 
पर भीष्म आज भी ज़िंदा है......, 
हर उस इंसान में, 
जो परिवार जिम्मेदारियों और वचनों के बीच 
धीरे - धीरे खुदको खो देता है !!    
 

Saturday, May 23, 2026

Zara Pass Baitho....,

अरे कहाँ......, 
अफ़रातफ़री में इधर उधर दौड़ रहे,
 
ज़रा पास बैठो......., 
सुन तो लो, हम भी कुछ कह रहे,
 
माना.., वक़्त के बड़े पाबंध हो तुम, 
सुना आजकल कलाई घड़ी में बंद हो तुम,
 
घड़ी तुम्हारे, हर मिनट का हिसाब रखती है, 
क्या..., कैलकुलेटर से ज़िंदगी चलती है,

सुबह से शाम भागते रहते हो तुम, 
कभी काम के पीछे, कभी ज़िम्मेदारियों के नीचे,
 
अपनी हर दौड़ का हिसाब रखते - रखते,
शायद....., मैराथन जीत गए हो तुम,

कभी गौर किया है ?
रात तो वही है, पर आपस में वो बात नहीं,
 
न पहले जैसी बातों पर,आती ये मुस्कान सही,
माना...,वक़्त की तुम्हें बहुत तंगी है,
 
पर ये न भुलो....,
किसी की दुनियाँ के अकेले हक़दार हो तुम,

मंज़िल पाने की होड़ में, 
खो चुके तुम....,खुद को इस भीड़ में,

जिसके साथ था तुम्हें चलना,  
उसे रूककर भी सुनना भूल चुके हो तुम,
  
जो तलाशते है, दुनियाँ में सच्चे रिश्तें,
वो हक़ दे पूछने का मुझे, 
क्या बिखरे मन संभाल सकते हो तुम !!


  
 

Saturday, May 16, 2026

Jarurat Kya Haii...,

एक अधूरी मोहब्बत की गहरी दास्तान 

तेरी खामोशियों को अब, सुनने की जरुरत क्या है,
दिल से जो उतर गए तुम , तुम्हें बुलाने की, 
जरुरत क्या है !!

जब आसूँ ही बयां कर दे, दिल की हर कहानी,
फिर दर्द को लफ़्जों में, बताने की,
जरुरत क्या है !!

तेरी आँखों में कभी, अपना मुकम्मल जहां देखा था, 
अब किसी और को ख़्वाब में, सजाने की,
जरुरत क्या है !!
 
आज तेरे संग महफ़िल में, कई चेहरे नए रिश्ते है, 
पुराने रिश्तों को फिर, आजमाने की, 
जरुरत क्या है !!

तेरी सुनहरी यादों का रंग, आज भी आँखों में बाकि है,
फिर किसी और शख़्स से, दिल लगाने की,
जरुरत क्या है !!

सीख लिया है अब, बिना मरहम के मैंने जीना,
हर जख़्म ज़माने को, अब दिखाने की, 
जरुरत क्या है !!
   
अगर इश्क़ सच्चा है तो, एक दिन तू लौट आएगा,
हर रोज़ तुझे, पुकारने की, 
जरुरत क्या है !!

मैं आज भी तेरे, इंतज़ार में उस मोड़ पर हूँ, 
किसी और राह पर, अनजान संग जाने की, 
जरुरत क्या है !!



Saturday, May 09, 2026

Kuch Ankahein Si....,

ए खुदा तेरे इस जहां में, ऐसे  मंजर क्यों है ,

चेहरे तो हँसते, पर छिपे गहरे समंदर क्यों है !!

ये बस बातों का सिलसिला है, कोई वादा तो नहीं,

फिर हर लफ्ज़ में दिखता, सालों का सफ़र क्यों है !!

मासूम दिल में छुपे हैं, अनकहे से अफ़साने,

लब खामोश हैं, मगर ये आँखों में बवंडर क्यों है !!

ना हाथों में हाथ है , ना आँखों से मुलाक़ात,

फिर भी रातों को ,रहता "हम्म " का इंतज़ार क्यों है !! 

कोई पास होकर भी, बहुत दूर सा लगता है, 💑

पर एक अजनबी, लगता दिल के इतना अंदर क्यों है !!

बस दोस्ती की राह पर, हमने बढ़ाए थे कदम,

फिर उसकी हर बात का, होने लगा असर क्यों है !!

कभी कुछ रिश्ते, बिना नाम के भी खास होते हैं,

पर ये बात कहीं आम न हो, लगता फिर इसे डर क्यों है !!

वो कम बोलता है, मगर महसूस हुआ उसे भी है,

उसकी ख़ामोशी में भी, जिक्र ये बार - बार क्यों है !!

ए खुदा, तेरे इस जहाँ में ये मंजर क्यों है,

छोटी बातों का भी होता, इतना असर क्यों है !! 💕💕💕

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