Monday, June 15, 2026

Pahli Mausmi Barsaat......,

याद है मुझे,.....,
पहली मौसमी बरसात में, मिले थे हम,
वो भीगी सड़कें और वो ठहरी शाम,
गुज़रते लम्हों की महक में, 
बस सपने बुन रहा था मैं ,
तेरे संग यूँ ही आगे निकल गया था मैं,
कैसे कहूँ तुम्हें  ?
अब तक समझ न पाया मैं,
ये मौसम का फसाना था, 
या तेरी बातों का तराना, 
भीग रही थी जहाँ बारिश में दुनियाँ,
मेरा नशा बस तेरा मुस्कुराना था, 
तेरी जुल्फ़ से गिरती बूँदें, 
कुछ देर और जो ठहर जाती, 
तेरे नाम लिखी अधूरी ग़ज़ल मेरी, 
एक और मुक़म्मिल हो जाती, 
वो तेरा पास बैठना और चुप रहना, 
फिर आँखों से रु ब रु कहना, 
उस दिन बारिश ज्यादा तेज थी, 
दिल में शोर भी नया था, 
एक छतरी तो हाथ में थी पर,
साथ एक रिश्ता भी संग चला था, 
भीगी हुई शाम के संग,
जब भी अब सावन दस्तक देगा, 
तेरा चेहरा याद आएगा,
फिर से दिल तेरा हो जाएगा,
मोहब्बत का अगर कोई पहला लफ़्ज़ है,
तो मेरे लिए वो तेरा नाम है,
और अगर इबादत का कोई चेहरा है,
तो यक़ीनन वो तेरा ही अक्स है !!


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