Saturday, July 22, 2023

Jadoo.....

 ऐसा लगता है आजकल.......,                      
                           .......  हम थोड़ा ज्यादा फ़िक्र में रहते है ! 

चलते चलते राहों में अकसर,कदम भी हिचकोले लेते है !!

सुनी राहों में भी अब, कहाँ हम अकेले होते है !!!

👫💖👫

अनसुनी हर आहट भी, अब तेरे आने का जिक्र करती है !

आते - जाते हर निशां को ये, बड़े गौर से देखा करती है !!

झिलमिल ही सही पर इन में, तेरे साथ का वो नज़ारा है !!!

💕💑💕

जो ढलती हर शाम हमने साथ, खुली आँखों से निहारा है !

उन तन्हाँ रातों की बात क्या करुँ, बात पुरानी सी लगती है !!
  
आज तो हर कली कहती कहानी, अपनी सी लगती है !!!

💓👌💗

जुगनुँओं से सजी ये रात, जिसमें तारे भी चमकते है !

दिया बाती है दुल्हा दुलहन आज,तो पतंगें बाराती से लगते है !!

क्या इन्हें तुमने, जमीं से पहले मेरी आँखों में उतारा है !! 

संग मेरे रहे तू ,तेरी फिक्र में मैं,
 
और कुछ न मिले इस जहाँ से.........आज से ये भी गवारा है !!! 

 💝💞💝  
 

Thursday, March 09, 2023

Ek Shaam......

मन के मरू पर लगा है गिद्धों का पहरा, 
दिल की दहलीज़ खुली फिर चमका एक भरम का तारा,
जिस्मों के भीड़ में भटक रहा जाने कब से रूह अकेला !!

शहरी लिबाज़ में लिपटा देहाती रेत सा मन,
हर कदम में फिसलती, हर लहर से गुजरती,     
आशाओं के गलियारें में आकर सिमटती !!

दूर कहीं से देखता और कहता मन का किनारा,
ये समंदर के नहीं,......मन के उठे भंवर है,
जो स्थिर लहरों में भी,कई सवाल लिए खड़े है !! 
 
अशांत लहरों में भी सीप सा शांत यूँ  बैठना, 
अपनी नख से जमी पड़ी रेत को कुरेदना,
आती - जाती किरणों का जब हथेली से हो सामना !!

ऐसी कल्पनाओं की एक शाम......,  
इंतज़ार था जाने कब से इस दहकती शाम का,
हर शुष्क याद जिसमें जल जाए और ढल जाए,
नम आँखों में बन के काज़ल गहरा !!

ये एक शाम,..... ढ़लती चाहत के नाम कर दूँ ,
आँखों के सीप खोलूँ और हर बूँद को मोती कर दूँ ,
गुम हो जाए न ये लहर में कहीं, 
सारे के सारे आज इस समंदर के नाम कर दूँ !!
 

Thursday, January 26, 2023

Poonam Ka Chaand....

  

क़िस्सा है पूनम की रात का.......,  

तारों के बीच बैठा,एक टुकड़ा चाँद का,

सबकी नज़रों से दूर है वो......,

पास होकर तारों के भी,खुद में मसरूफ है वो,

रोज़ ये आता है,यूहीं घाट लगाता है,

आज क्या बात है....क्या दिन कोई ख़ास है,

कभी आधा,कभी पूरा और आज तो,

पलक झपके बिना कर रहा दीदार वो,

जैसे लगता है धरा पर करने आया,

दिनों बाद फिर से अमृत पान वो....., 

तन्हा सांझ और सुखा कली का हर दुकान,

आँखों की शरा से ज़रा सी टपकी नमी और देखो खिल उठा नमी का चाँद,

चंद टुकड़े इसके,आओं बंज़र जमीं को बाँट दे,हर कली का ये माथा चूमें,इतने दिन जाने विरह के कैसे बीते, 

                          आज इस पल में सब बातों को विराम कर दे,

                       चलों ये रात,जुगनूओं,परो और परिंदों के नाम कर दे......,   



                                                                                                         


                    

 


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