If you are feeling heartbroken and looking for sad shayari in hindi, these emotional lines will express your feelings perfectly. sometimes pain cannot be explained, but words can help you release your emotions. these sad love shayari are perfect for those who are going through breakup or loneliness.
Friday, June 26, 2026
Sabse Haseen Alfaaz Ho Tum....,
Monday, June 15, 2026
Pahli Mausmi Barsaat......,
Saturday, May 30, 2026
Yuhi Tu Sang Rahna.....,
Saturday, May 16, 2026
Jarurat Kya Haii...,
Saturday, May 09, 2026
Kuch Ankahein Si....,
मासूम दिल में छुपे हैं, अनकहे से अफ़साने,
लब खामोश हैं, मगर ये आँखों में बवंडर क्यों है !!
ना हाथों में हाथ है , ना आँखों से मुलाक़ात,
फिर भी रातों को ,रहता "हम्म " का इंतज़ार क्यों है !!
कोई पास होकर भी, बहुत दूर सा लगता है, 💑
पर एक अजनबी, लगता दिल के इतना अंदर क्यों है !!
बस दोस्ती की राह पर, हमने बढ़ाए थे कदम,
फिर उसकी हर बात का, होने लगा असर क्यों है !!
कभी कुछ रिश्ते, बिना नाम के भी खास होते हैं,
पर ये बात कहीं आम न हो, लगता फिर इसे डर क्यों है !!
वो कम बोलता है, मगर महसूस हुआ उसे भी है,
उसकी ख़ामोशी में भी, जिक्र ये बार - बार क्यों है !!
ए खुदा, तेरे इस जहाँ में ये मंजर क्यों है,
छोटी बातों का भी होता, इतना असर क्यों है !! 💕💕💕
Tuesday, April 28, 2026
Num aakhon ka aasmaan.....,

Thursday, March 20, 2025
Hamare Beech.......,
Saturday, November 16, 2024
Jaa...Rahi Thi Mein
Saturday, July 22, 2023
Jadoo.....
Thursday, March 09, 2023
Ek Shaam......
Thursday, January 26, 2023
Poonam Ka Chaand....
क़िस्सा है पूनम की रात का.......,
तारों के बीच बैठा,एक टुकड़ा चाँद का,
सबकी नज़रों से दूर है वो......,
पास होकर तारों के भी,खुद में मसरूफ है वो,
रोज़ ये आता है,यूहीं घाट लगाता है,
आज क्या बात है....क्या दिन कोई ख़ास है,
कभी आधा,कभी पूरा और आज तो,
पलक झपके बिना कर रहा दीदार वो,
जैसे लगता है धरा पर करने आया,
दिनों बाद फिर से अमृत पान वो.....,
तन्हा सांझ और सुखा कली का हर दुकान,
आँखों की शरा से ज़रा सी टपकी नमी और देखो खिल उठा नमी का चाँद,
चंद टुकड़े इसके,आओं बंज़र जमीं को बाँट दे,हर कली का ये माथा चूमें,इतने दिन जाने विरह के कैसे बीते,
आज इस पल में सब बातों को विराम कर दे,
चलों ये रात,जुगनूओं,परो और परिंदों के नाम कर दे......,
Thursday, April 15, 2021
Ek Khwaab....
बात है सीधी सी...... पर लगती है पहेली सी,
जब भी ये आती है, रात करवट में कट जाती है,
आँखों में बेचैनी की लहरें.......और धड़कन में,
...........नई हरकत सी भर जाती है !!
💗💗💗
इसे सवारने को.....पड़ी सिलवटें हटाने को,
जाने कब नज़रे आईना बन जाती है,
बड़ी पाबन्द होती है पलकें...... फिर भी,
रुक - रुक कर ये.....दिल को सलाम कर जाती है !!
💝💝💝
बस एक ख़्वाब है तू......... सिर्फ़ एक ख़्वाब....
फिर क्यों ? ........ तेरे इंतज़ार में,
ये पलकें टकटकी लगाये, घड़ियाँ निहारती रहती है,
........ तेरे सिर्फ़ जिक्र से,
आते - जाते हर ख़्वाब को गिला कर जाती है !!
💖💖💖
नहीं आता समझ मुझे, शिकायत करू या जाने दूँ,
या इन्हें जोड़ नई कहानी बुनूँ.........
या बाकि सपनों की तरह, इसकी प्यास को भी,
.......अपने अंदर मेहफ़ूज़ करूँ !!
Tuesday, August 18, 2020
Tu Issh Tarah Se......
जहाँ तलक जाए ये नज़रे........
लगे नज़ारों में तेरी कमी सी है,
तेरे बैगैर राहें भटक गई थी कहीं
ढूँढा हर शह, हर गली, हर मीनारों में,
तुझ में खोकर हि हुई पूरी तलाश मेरी
अब सिर्फ तू ही अपना जो रोशन गैरों की महफ़िल में है,
तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है...........
ये आसमां ये सितारें कर रहें जहां रौशन
फ़िर भी बैठा हूँ मैं शाम -ए- ग़म के अँधेरों में,
तलाश में तेरी कई मुद्दत से हूँ मैं
ख़फ़ा हूँ पर तुझ में हूँ बाकि जगह लापता हूँ मैं,
मैं हूँ एक जलता दिया तू जिसकी रोशनी है
क्या कहूँ तुझ बिन ज़िंदगी लगती अधूरी है
पनाह में तेरी हर हसरतें भी मेरी क़ामिल है
तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है..........
Friday, August 07, 2020
Khushboo...
अब ग़ुमनाम होने की हसरत है
देखूँ जब भी आसमां
होने लगती दूरी से नफ़रत है
जलते दीये की रोशनी भी
तब चाँद सी लगती है
जब अजनबी शहर में
अँधेरी रात.........
थोड़ी ठहर कर गुज़रती है
चलो कुछ माहौल
साझा करते है
खूबसूरत लोग और कुछ
खूबसूरती की बात करते है
करीने से लगा रखें है......
टेबल पर मौसमी फूलों के
जैसे बाज़ार सजा रखें है
आस - पास भिनना रहे
कई चाहने वाले
छिनकर रंगत इसकी
खुद को कहे इनके रखवाले
हो गया है इश्क़ इन्हें
फूलों की संगत से
सोचे रंग - संग ख़ुश्बू भी
कर दे इनके हवाले........
बचे कुछ कोरे पन्ने है
सूखी जिसमें कुछ पंखुरियाँ है
देख इन्हें लगता है
हर साथ होता यहाँ अधूरा है.......
कुछ बीती बातें है इस ज़िंदगी की
अब भी अनकही.........
मुड़कर यूँ देखती है मुझको
जैसे जानती तक नहीं.......
Monday, July 27, 2020
Ijaazat Toh Do....
कभी चहल कदमी में....कभी नंगी फ़र्श पर लेटे
आसमां को निहारते कहा कई दफ़ा
मौसम -ए- हालात कैसा भी हो गुरेज़ नहीं
कर सकूँ अपनी बेचैनियों की हिफाज़त इतनी मोहलत तो दो !!
सुबह की पहली किरण से पलकें है भाड़ी
इनपर भी हो कभी ओस की बारिश
सोयी नहीं कब से नगमें हमारी
छेड़ दे ज़रा वो धुन.....जो लगे तुझे प्यारी
इन गीतों की तरह आधे - अधूरे ख़्वाब है
इन्हें फिर आँखों में सजोने की इजाज़त तो दो !!
धीमी - धीमी पिछली रात संग मेरे जो नज़म जली
सुबह से मिलने भोर तक थी मेरे पास रुकी
फर्श पर अभी कतरन सी बिछी और थोड़ी सी राख़ बची
कर दूँ इसे मिट्टी के हवाले पहले जख़्मों पर मलने तो दो !!
आया है सावन..... मौसम लिए बारिश
जमीं से मिलने की हो रही फिर से साज़िश
दिल करता है मैं भी कर दूँ लम्हों को
लफ़्ज़ों में बीत जाने की गुज़ारिश
गीली पड़ी है दिल की जमीं इनमें ख़्वाब के बीज बोने तो दो !!
Saturday, July 18, 2020
Phir Yeh Raat Akelii...
.......सूखी लगे शामे
.........सूरज से लगाई गुहार कई
.........छुपकर किरणों से फ़िर बनने मेरी सहेली
💫 💫 💫 💫
.........कुछ इसकी सुनूँ
........उन वादों की देने दुहाई
लो इसी बहाने रात......
........फिर मुझसे मिलने आई
सोचा कई बार.......छोड़ दूँ इसका भी साथ
फिर याद आई.......
.........बीती रात जो थी वीरानी
हर मोड़ मिली......
.......पर जो न सुलझी वो तू पहेली
........ तू ही मात्र सहेली
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली.....
💗 💗 💗 💗
गुज़री हर लम्हें मैं..........
कहने को इक बूँद न गिरी......
.........फिर भी भीगी हूँ इश्क़ की बरसात में
.......सच कब कैसे होगी
........नसीब अपनी रौशनी होगी
अंजाना सा डर है मुझे.......
........फिर भी चाहूँ दिल से दुआ दे तू मुझे
याद शहर से संग आई.......
........ तू ही बची एक करीबी है
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली......
Thursday, July 09, 2020
Lo Phir Aayii.....
सुना है मैंने कई किस्से, तेरे मेरे जज़्बातोँ के,
तुम आओ तो तुम्हें कह दूँ, होता नहीं अच्छा
आदत हो गर देर से आने की !!
सच है ये.......सही चाहत हो गर, फ़र्क पड़ता नहीं,
तय किए कितने मिलों का सफ़र,
सुनी पड़ी राहें खोल के बाहें, करें गुज़ारिश बीते
लम्हों को फ़िर से गुजरने की !!
सुन लेती है.........ये अकसर वो सदायें भी
मुमकिन नहीं जिनका, तसव्वुर में आना भी,
लो हुई शाम भी भाड़ी, करवटों में गुज़री रात सारी
सोचूँ जब भी दिल को बहलाने की !!
होता नहीं आसां.......बिखरे अल्फ़ाज़ों को समेटना,
लगे यूँ जैसे पुराने ज़ख्मों को कुरेदना,
रहता है साझे रिश्तों का मर्तबान खाली, है जरुरत
नई यादें फ़िर इक बार सजोने की !!
Monday, June 29, 2020
Dard Ka Sahar....
पीछा किया ताउम्र अनकहे लफ्जों का
जाने कब वो किसी और के हो लिए !!
आसां न था जाना उधर मालूम हो ये है "दर्द का शहर"
टूट कर उलझी वादों में रिश्तों की डोरी,
सूखे जख़्म में सिर्फ़ जलन थी भरी,
ख़्वाब में अकसर दिखें छिपे काले साये,
गहरे सन्नाटे उसे और करीब लाए !!
इक टुकड़ा बन आज भी सीने में वो नम सा है,
तेरा ग़म जो लगता कभी - कभी मरहम सा है,
आदतन सोचूँ यू होता तो अच्छा होता,
सोचो तो क्या थे और क्या हो गए हम,
कहाँ खो गए राही तुम रफ़्ता - रफ़्ता,
पढ़ लेते थे बिन कहे ख़ामोशी भी तुम,
दुनियाँ की दौड़ में चलना भूल गए आहिस्ता आहिस्ता तुम !!
इक बार फिर अपनी पनाह में रखना,
इस बार सिर्फ मेरे लिए आना !!
Wednesday, June 03, 2020
Yaadon ki baarish.....
यादों की बारिश में......,
भीगा मन लगा है करने फरमाईशें,
बढ़ रहीं मुसलसल इसकी ख़्वाहिशें,
कुछ धुंधले चेहरे बन सवर आए जो थे सिर्फ़ ख्यालों में,
दुनियाँ के इस मजमें में माना तन्हा हर कोना है,
मयकदों से भरा यूहीं नहीं मयखाना है,
जरुरी नहीं हर तराना हो मुक़म्मिल jaana,
आसमां भी लगा यहाँ आधे चाँद की नुमाईश में,
रास न आया कभी तेरे रूह से महरूम होना मुझे,
पाने - खोने के ग़म से पल में उभरना मुझे,
तन्हा पड़ा रहा वजूद दाग़ -ए- उल्फ़त की खाई में,
सोचा रखूँगा मेहफ़ूज़ इसे सुनहरी याद की तरह,
बेसबब हुए चूर - चूर वक़्त की साज़िश में,
मुश्किल रहा पुरानी यादों का सफ़र,
ग़म जो सोया नहीं बताए कोई उसे जगाए किस तरह,
लब हो गए है ख़ामोश अल्फाज़ों की आज़माईश में,
यादों की बारिश में भीग....अकसर ख़ुद से दूर हुए..........
तेरे इश्क़ की बेरोज़गारी से......फ़िर हम मशहूर हुए..........
Friday, May 22, 2020
Mere Ahsaas....
चार दीवारों में क़ैद थी सारी मस्तियाँ,इज़ाज़त कम थी जीने की फिर भी,
सस्ता लगा साँसों को थामना,
मिली फुर्सद तेरे ग़म को महसूस करने कि,
आँखों का सपना नहीं जो पल में खो जाऊ,
दर्द का रिश्ता है ये लिपटा जो अंजुमन से तेरे,
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