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Friday, June 26, 2026

Sabse Haseen Alfaaz Ho Tum....,

कैसे बताऊ तुम्हें मेरे लिए तुम क्या हो ?
💕
मस्जिद की पहली अज़ान हो तुम, 
माँगा जिसे रोज़ दुआओं में हम ,
रात सिरहाने खुले थे जो ख़्वाब, 
उसकी हसीं शुरुवात हो तुम !! 
💗
सुनहरी धूप की किरण नभ से,
छन - छन आती जमीं पर,
ज़ेहन के जगते सवालों में, 
अकसर हो जाता हूँ मैं ग़ुम !!
💘
ख़ामोशी से नज़रे पढ़ रही,
सुने लम्हों में लिखी किताब, 
चाँद की इस ठंडी रोशनी में, 
सुकून भरी कोई रात हो तुम !!
💑
दो लफ्जों में बट गए मेरे अक्षर,
जिसका पन्ना तूने पढ़ा नहीं,
वाकिफ़ है यहाँ सब मेरे लहज़े से,
पर इन लफ्ज़ों की पहचान हो तुम !! 
💖
लिखना चाहा तुझे कई दफ़े,
खामोशियों में छुपे जज़्बात हो,
मेरी अधूरी सी ग़ज़ल का, 
सबसे हसीं अल्फ़ाज़ हो तुम !!
💝
न सोना, न चाँदी, न कोई ताज़,
बस मेरे हाथों को तेरे हाथों का साथ,
न मिटने वाली उम्र भर, 
उस मोहब्बत का आगाज़ हो तुम !!
💞💞
लगता है वक़्त आज भी वहीं कहीं अटका है,
जहाँ तेरा नाम मेरे ख्यालों में महका है,
यादें तेरी छेड़ जाती हैं दिल में मीठी शरारतें,
लबों पे बिन वजह ठहरती वो मुस्कान हो तुम,   
मेरी अधूरी सी ग़ज़ल का, 
सबसे हसीं अल्फ़ाज़ हो तुम 💫 💕 💫 💕 💫

Monday, June 15, 2026

Pahli Mausmi Barsaat......,

याद है मुझे.....,
पहली मौसमी बरसात में, मिले थे हम,
वो भीगी सड़कें और वो ठहरी शाम,
गुज़रते लम्हों की महक में, 
बस सपने बुन रहा था मैं ,
तेरे संग यूँ ही आगे निकल गया था मैं,
कैसे कहूँ तुम्हें  ?
अब तक समझ न पाया मैं,
ये मौसम का फसाना था, 
या तेरी बातों का तराना, 
भीग रही थी जहाँ बारिश में दुनियाँ,
मेरा नशा बस तेरा मुस्कुराना था, 
तेरी जुल्फ़ से गिरती बूँदें, 
कुछ देर और जो ठहर जाती, 
तेरे नाम लिखी अधूरी ग़ज़ल मेरी, 
एक और मुक़म्मिल हो जाती, 
वो तेरा पास बैठना और चुप रहना, 
फिर आँखों से रु ब रु कहना, 
उस दिन बारिश ज्यादा तेज थी, 
दिल में शोर भी नया था, 
एक छतरी तो हाथ में थी पर,
साथ एक रिश्ता भी संग चला था, 
भीगी हुई शाम के संग,
जब भी अब सावन दस्तक देगा, 
तेरा चेहरा याद आएगा,
फिर से दिल तेरा हो जाएगा,
मोहब्बत का अगर कोई पहला लफ़्ज़ है,
तो मेरे लिए वो तेरा नाम है,
और अगर इबादत का कोई चेहरा है,
तो यक़ीनन वो तेरा ही अक्स है !!


Saturday, May 30, 2026

Yuhi Tu Sang Rahna.....,

दुआ के साथ अज़ान, 
सुर के साथ जैसे तान, 
काज़ल की तरह तू आँखों में सजना, 
यूँ ही तू संग रहना......,
 
छू कर मन को दिल में उतरना, 
बारिश की पहली बूँद सा लगना, 
दुनियाँ की भीड़ में बस तू मेरा होना, 
यूँ ही तू संग रहना.......,
❤❤ 
बन के ग़ज़ल मेरी बातों में बसना, 
चाँद की चुप सी रोशिनी बन, 
मेरी रातों में बिखरना, 
यूँ ही तू संग रहना......,
❤💗❤ 
लबों पे हल्की सी हँसी रखना, 
बाँहों में थोड़ा सा जहां सजना, 
कभी जो ख़ामोश हो जाऊ, 
बिन कहे तू समझ लेना, 
यूँ ही तू संग रहना......,
❤💕❤
न बड़े वादे न शोर मोहब्बत का करना, 
छोटी छोटी बातों में यूँ प्यार रखना, 
जैसे आँसू को आँखें संभाले सजना,
यूँ ही तू संग रहना......,
💕💓💕 
लिखूँ तुझे रोज़ाना जैसे इबादत पुरानी, 
तेरा साथ लगे जैसे रूह की कहानी, 
तेरे बगैर कुछ और अब न कहना सुनना, 
उम्र भर यूँ ही तू संग रहना......, 
💑💝💑

Saturday, May 16, 2026

Jarurat Kya Haii...,

एक अधूरी मोहब्बत की गहरी दास्तान 

तेरी खामोशियों को अब, सुनने की जरुरत क्या है,
दिल से जो उतर गए तुम , तुम्हें बुलाने की, 
जरुरत क्या है !!

जब आसूँ ही बयां कर दे, दिल की हर कहानी,
फिर दर्द को लफ़्जों में, बताने की,
जरुरत क्या है !!

तेरी आँखों में कभी, अपना मुकम्मल जहां देखा था, 
अब किसी और को ख़्वाब में, सजाने की,
जरुरत क्या है !!
 
आज तेरे संग महफ़िल में, कई चेहरे नए रिश्ते है, 
पुराने रिश्तों को फिर, आजमाने की, 
जरुरत क्या है !!

तेरी सुनहरी यादों का रंग, आज भी आँखों में बाकि है,
फिर किसी और शख़्स से, दिल लगाने की,
जरुरत क्या है !!

सीख लिया है अब, बिना मरहम के मैंने जीना,
हर जख़्म ज़माने को, अब दिखाने की, 
जरुरत क्या है !!
   
अगर इश्क़ सच्चा है तो, एक दिन तू लौट आएगा,
हर रोज़ तुझे, पुकारने की, 
जरुरत क्या है !!

मैं आज भी तेरे, इंतज़ार में उस मोड़ पर हूँ, 
किसी और राह पर, अनजान संग जाने की, 
जरुरत क्या है !!



Saturday, May 09, 2026

Kuch Ankahein Si....,

ए खुदा तेरे इस जहां में, ऐसे  मंजर क्यों है ,

चेहरे तो हँसते, पर छिपे गहरे समंदर क्यों है !!

ये बस बातों का सिलसिला है, कोई वादा तो नहीं,

फिर हर लफ्ज़ में दिखता, सालों का सफ़र क्यों है !!

मासूम दिल में छुपे हैं, अनकहे से अफ़साने,

लब खामोश हैं, मगर ये आँखों में बवंडर क्यों है !!

ना हाथों में हाथ है , ना आँखों से मुलाक़ात,

फिर भी रातों को ,रहता "हम्म " का इंतज़ार क्यों है !! 

कोई पास होकर भी, बहुत दूर सा लगता है, 💑

पर एक अजनबी, लगता दिल के इतना अंदर क्यों है !!

बस दोस्ती की राह पर, हमने बढ़ाए थे कदम,

फिर उसकी हर बात का, होने लगा असर क्यों है !!

कभी कुछ रिश्ते, बिना नाम के भी खास होते हैं,

पर ये बात कहीं आम न हो, लगता फिर इसे डर क्यों है !!

वो कम बोलता है, मगर महसूस हुआ उसे भी है,

उसकी ख़ामोशी में भी, जिक्र ये बार - बार क्यों है !!

ए खुदा, तेरे इस जहाँ में ये मंजर क्यों है,

छोटी बातों का भी होता, इतना असर क्यों है !! 💕💕💕

Tuesday, April 28, 2026

Num aakhon ka aasmaan.....,

 
ख़ुदको बचा रखा था जिससे 
वो मंजर आज नग्न आँखों से 
देख रही हूँ !!

धूप भी आज मायूस हो बैठी  
रोशनी चाँद को बिखेरती 
देख रही हूँ !!

टूटा नहीं एक भी तारा
पर आसमां जमीं पर उतरा 
देख रही हूँ !!

ख़ामोशी भरी वो लंबी रातें 
दिल से जो अब करती है बातें  
देख रही हूँ !!  

छुटी नहीं हौसलों की डोरी बस
आँखों की बारिश में थोड़ी गीली 
देख रही हूँ !!

नम आँखों में भी एक चमक है 
टूटकर भी इनमें जीने की ललक है
देख रही हूँ !! 

जो खोया वो किस्मत का हिस्सा 
जो पाया वो मेरा किस्सा बनते 
देख रही हूँ !!

तेरा नाम हवा में घुल सा गया 
हर लम्हा जैसे रुक्सा गया 
देख रही हूँ !!

"कभी कभी आसूँ भी कहानी कहते है 
और वही हमें मजबूत बना देते हैं !! 



Thursday, March 20, 2025

Hamare Beech.......,

वो आई थी पास मेरे 
चंद लम्हें थी साथ मेरे 
हाथों में थे हाथ पड़े  
चुड़ियों में थे जज़्बात सजे,
💑
ख़ामोश सज रहे थे लट 
खुल न रहे थे लब 
जैसे बंधे पड़े थे सारे शब्द,
👫
क्या ऐसा भी हो सकता है 
लबों के साथ - साथ 
शब्द भी सुख सकता है,
👨👩
गुमसुम चुपचाप सी 
ऐसी तो न थी पहले खुशी,
👩
जब तक तेरे संग रहा  
नासमझ बन दर्द में भी सर्द रहा,
💕💕   
पल रही पहलू में जो ख़ामोशी है
किसे कहूँ कौन इसका दोषी है,
💗💗  
आँखें है ये तेरी या आईना   
फितरत साफ - साफ झलकते है 
इनके भी होते अपने करिश्में 
सूरज में भी दीखते आज धब्बे है,
👫
होके भी आज तू संग नही  
हाथ तो है पर साथ नही,
लगता है बुत बनने की आई आज अर्ज़ी है 
और बनके काफ़िर कहते है ख़ुदा की मर्ज़ी है !! 
💔💔💔💔   

Saturday, November 16, 2024

Jaa...Rahi Thi Mein

कितना अलबेला है संसार.......,  

उबड़ खाबड़ पगडण्डियाँ  

शरद से सुखी पड़ी है सारी डंडियाँ,

लो हो गई नए रुत की शुरूवात    

लगने लगी फिर ओसों की कतार !! 

नख सिकोड़ती, हर कदम से जमीं को टटोलती,

अक्स को अपने बूँदों में कहीं तलाशती  देखे  

जा रही थी मैं..........,  

आसमां के नीचे, नन्हीं किरणों से बचते

खुद को आँचल में जमीं के सिमटते देखे 

जा रही थी मैं............,

ये सोंधी मिट्टी की खुश्बू , जिसमें इत्र सा जादू

धीरे धीरे ही सही, अपने नसों में घुलते इसे देखे 

जा रही थी मैं............, 

आँखें खोलूँ या बंद रखूँ या और थोड़ा सब्र रखूँ 

इस बगियाँ में आज भी, खुदको ही अकेला देखे

जा रही थी मैं............., 

लगा हर तरफ है होड़, था मगर ये जज़्बातों का शोर

चाहा बहुत रहूँ बेअसर, फिर भी आ जाते है नज़र ये देखे

जा रही थी मैं.............,  

मिली फुर्सत न मुझे मेरे भँवर से, न जाने कब से इनसे घिरी हूँ, 

साल दर साल परत दर परत, सीलन सी इनमें पड़ी खुद को देखे  

जा रही थी मैं.............,   

💝💝💝

Saturday, July 22, 2023

Jadoo.....

 ऐसा लगता है आजकल.......,                      
                           .......  हम थोड़ा ज्यादा फ़िक्र में रहते है ! 

चलते चलते राहों में अकसर,कदम भी हिचकोले लेते है !!

सुनी राहों में भी अब, कहाँ हम अकेले होते है !!!

👫💖👫

अनसुनी हर आहट भी, अब तेरे आने का जिक्र करती है !

आते - जाते हर निशां को ये, बड़े गौर से देखा करती है !!

झिलमिल ही सही पर इन में, तेरे साथ का वो नज़ारा है !!!

💕💑💕

जो ढलती हर शाम हमने साथ, खुली आँखों से निहारा है !

उन तन्हाँ रातों की बात क्या करुँ, बात पुरानी सी लगती है !!
  
आज तो हर कली कहती कहानी, अपनी सी लगती है !!!

💓👌💗

जुगनुँओं से सजी ये रात, जिसमें तारे भी चमकते है !

दिया बाती है दुल्हा दुलहन आज,तो पतंगें बाराती से लगते है !!

क्या इन्हें तुमने, जमीं से पहले मेरी आँखों में उतारा है !! 

संग मेरे रहे तू ,तेरी फिक्र में मैं,
 
और कुछ न मिले इस जहाँ से.........आज से ये भी गवारा है !!! 

 💝💞💝  
 

Thursday, March 09, 2023

Ek Shaam......

मन के मरू पर लगा है गिद्धों का पहरा, 
दिल की दहलीज़ खुली फिर चमका एक भरम का तारा,
जिस्मों के भीड़ में भटक रहा जाने कब से रूह अकेला !!

शहरी लिबाज़ में लिपटा देहाती रेत सा मन,
हर कदम में फिसलती, हर लहर से गुजरती,     
आशाओं के गलियारें में आकर सिमटती !!

दूर कहीं से देखता और कहता मन का किनारा,
ये समंदर के नहीं,......मन के उठे भंवर है,
जो स्थिर लहरों में भी,कई सवाल लिए खड़े है !! 
 
अशांत लहरों में भी सीप सा शांत यूँ  बैठना, 
अपनी नख से जमी पड़ी रेत को कुरेदना,
आती - जाती किरणों का जब हथेली से हो सामना !!

ऐसी कल्पनाओं की एक शाम......,  
इंतज़ार था जाने कब से इस दहकती शाम का,
हर शुष्क याद जिसमें जल जाए और ढल जाए,
नम आँखों में बन के काज़ल गहरा !!

ये एक शाम,..... ढ़लती चाहत के नाम कर दूँ ,
आँखों के सीप खोलूँ और हर बूँद को मोती कर दूँ ,
गुम हो जाए न ये लहर में कहीं, 
सारे के सारे आज इस समंदर के नाम कर दूँ !!
 

Thursday, January 26, 2023

Poonam Ka Chaand....

  

क़िस्सा है पूनम की रात का.......,  

तारों के बीच बैठा,एक टुकड़ा चाँद का,

सबकी नज़रों से दूर है वो......,

पास होकर तारों के भी,खुद में मसरूफ है वो,

रोज़ ये आता है,यूहीं घाट लगाता है,

आज क्या बात है....क्या दिन कोई ख़ास है,

कभी आधा,कभी पूरा और आज तो,

पलक झपके बिना कर रहा दीदार वो,

जैसे लगता है धरा पर करने आया,

दिनों बाद फिर से अमृत पान वो....., 

तन्हा सांझ और सुखा कली का हर दुकान,

आँखों की शरा से ज़रा सी टपकी नमी और देखो खिल उठा नमी का चाँद,

चंद टुकड़े इसके,आओं बंज़र जमीं को बाँट दे,हर कली का ये माथा चूमें,इतने दिन जाने विरह के कैसे बीते, 

                          आज इस पल में सब बातों को विराम कर दे,

                       चलों ये रात,जुगनूओं,परो और परिंदों के नाम कर दे......,   



                                                                                                         


                    

 


Thursday, April 15, 2021

Ek Khwaab....

बात है सीधी सी...... पर लगती है पहेली सी, 
जब भी ये आती है, रात करवट में कट जाती है, 
आँखों में बेचैनी की लहरें.......और धड़कन में, 
...........नई हरकत सी भर जाती है !!

💗💗💗
इसे सवारने को.....पड़ी सिलवटें हटाने को,  
जाने कब नज़रे आईना बन जाती है, 
बड़ी पाबन्द होती है पलकें...... फिर भी, 
रुक - रुक कर ये.....दिल को सलाम कर जाती है !!

💝💝💝
बस एक ख़्वाब है तू......... सिर्फ़ एक ख़्वाब....  
फिर क्यों ? ........ तेरे इंतज़ार में, 
ये पलकें टकटकी लगाये, घड़ियाँ निहारती रहती है,
........ तेरे सिर्फ़ जिक्र से,  
आते - जाते हर ख़्वाब को गिला कर जाती है !! 

💖💖💖
नहीं आता समझ मुझे, शिकायत करू या जाने दूँ,
या इन्हें जोड़ नई कहानी बुनूँ.........   
या बाकि सपनों की तरह, इसकी प्यास को भी, 
.......अपने अंदर मेहफ़ूज़ करूँ !!  

Tuesday, August 18, 2020

Tu Issh Tarah Se......

तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है.............  
जहाँ तलक जाए ये नज़रे........  
लगे नज़ारों में तेरी कमी सी है,

तेरे बैगैर राहें भटक गई थी कहीं
ढूँढा हर शह, हर गली, हर मीनारों में, 
  
तुझ में खोकर हि हुई पूरी तलाश मेरी 
अब सिर्फ तू ही अपना जो रोशन गैरों की महफ़िल में है,

तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है...........  
ये आसमां ये सितारें कर रहें जहां रौशन 
फ़िर भी बैठा हूँ मैं शाम -ए- ग़म के अँधेरों में,

तलाश में तेरी कई मुद्दत से हूँ मैं 
ख़फ़ा हूँ पर तुझ में हूँ बाकि जगह लापता हूँ मैं, 

मैं हूँ एक जलता दिया तू जिसकी रोशनी है   
क्या कहूँ तुझ बिन ज़िंदगी लगती अधूरी है

पनाह में तेरी हर हसरतें भी मेरी क़ामिल है  
तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है.......... 




Friday, August 07, 2020

Khushboo...

हर तरफ मशहूर हुआ इतना
अब ग़ुमनाम होने की हसरत है
देखूँ जब भी आसमां
होने लगती दूरी से नफ़रत है
जलते दीये की रोशनी भी
तब चाँद सी लगती है
जब अजनबी शहर में 
अँधेरी रात.........  
थोड़ी ठहर कर गुज़रती है
चलो कुछ माहौल  
साझा करते है
खूबसूरत लोग और कुछ
खूबसूरती की बात करते है
करीने से लगा रखें है......  
टेबल पर मौसमी फूलों के 
जैसे बाज़ार सजा रखें है
आस - पास भिनना रहे 
कई चाहने वाले
छिनकर रंगत इसकी 
खुद को कहे इनके रखवाले
हो गया है इश्क़ इन्हें 
फूलों की संगत से
सोचे रंग - संग ख़ुश्बू भी 
कर दे इनके हवाले........ 
बचे कुछ कोरे पन्ने है 
सूखी जिसमें कुछ पंखुरियाँ है 
देख इन्हें लगता है 
हर साथ होता यहाँ अधूरा है.......   
कुछ बीती बातें है इस ज़िंदगी की 
अब भी अनकही.........  
मुड़कर यूँ देखती है मुझको 
जैसे जानती तक नहीं.......   

Monday, July 27, 2020

Ijaazat Toh Do....

कितनी रूमानी रातें यूँ ही छत पर गुज़री
कभी चहल कदमी में....कभी नंगी फ़र्श पर लेटे
आसमां को निहारते कहा कई दफ़ा 
मौसम -ए- हालात कैसा भी हो गुरेज़ नहीं 
कर सकूँ अपनी बेचैनियों की हिफाज़त इतनी मोहलत तो दो !!

सुबह की पहली किरण से पलकें है भाड़ी  
इनपर भी हो कभी ओस की बारिश
सोयी नहीं कब से नगमें हमारी  
छेड़ दे ज़रा वो धुन.....जो लगे तुझे प्यारी
इन गीतों की तरह आधे - अधूरे ख़्वाब है 
इन्हें फिर आँखों में सजोने की इजाज़त तो दो !!

धीमी - धीमी पिछली रात संग मेरे जो नज़म जली 
सुबह से मिलने भोर तक थी मेरे पास रुकी
फर्श पर अभी कतरन सी बिछी और थोड़ी सी राख़ बची
कर दूँ इसे मिट्टी के हवाले पहले जख़्मों पर मलने तो दो !!

आया है सावन..... मौसम लिए बारिश 
जमीं से मिलने की हो रही फिर से साज़िश 
दिल करता है मैं भी कर दूँ लम्हों को 
लफ़्ज़ों में बीत जाने की गुज़ारिश 
गीली पड़ी है दिल की जमीं इनमें ख़्वाब के बीज बोने तो दो !!



Saturday, July 18, 2020

Phir Yeh Raat Akelii...

कैसे कहूँ कैसे कटी रातें 
                       .........दिन निकला सुबह हुई 
    ........फिर हुई यादों की बरसातें 
सूखे से है दिन..... 
                     .......सूखी लगे शामे
सूखी - सूखी सी है..... ख़्वाब में भीगी रातें 
     बेचैन हुई रात फ़िर..... 
          .........सूरज से लगाई गुहार कई   
दूर कैसे रहें अँधेरों से है इसे प्यार भी
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली.....
    .........छुपकर किरणों से फ़िर बनने मेरी सहेली
💫        💫           💫             💫
कुछ अपनी कहूँ..... 
          .........कुछ इसकी सुनूँ 
इक पल को भी संग इसके......चुप न रहूँ 
जो नीभ न पाई...... 
         ........उन वादों की देने दुहाई
लो इसी बहाने रात...... 
            ........फिर मुझसे मिलने आई  
💕        💕           💕              💕
सोचा कई बार.......छोड़ दूँ इसका भी साथ 
फिर याद आई.......  
          .........बीती रात जो थी वीरानी
गुज़रे पल थे ऐसे...... खड़ी सुनी हवेली जैसे
हर मोड़ मिली...... 
          .......पर जो न सुलझी वो तू पहेली  
बीतें दिनों की ठहरी 
            ........ तू ही मात्र सहेली 
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली.....
💗          💗           💗            💗
गुज़री हर लम्हें मैं.......... 
          .........पर रहा रुका साया इंतज़ार में
कहने को इक बूँद न गिरी......  
  .........फिर भी भीगी हूँ इश्क़ की बरसात में  
न जाने दिल की कही.......  
                .......सच कब कैसे होगी
मद्धम चाँद और तारों को कब......
              ........नसीब अपनी रौशनी होगी
अंजाना सा डर है मुझे.......
   ........फिर भी चाहूँ दिल से दुआ दे तू मुझे
याद शहर से संग आई.......
               ........ तू ही बची एक करीबी है 
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली......

    

Thursday, July 09, 2020

Lo Phir Aayii.....

लो फिर आयी......तेरी यादें लगी बढ़ने बेचैनियाँ रातों की,
सुना है मैंने कई किस्से, तेरे मेरे जज़्बातोँ के,
तुम आओ तो तुम्हें कह दूँ, होता नहीं अच्छा
आदत हो गर देर से आने की !!

सच है ये.......सही चाहत हो गर, फ़र्क पड़ता नहीं,
तय किए कितने मिलों का सफ़र,
सुनी पड़ी राहें खोल के बाहें, करें गुज़ारिश बीते
लम्हों को फ़िर से गुजरने की !!

सुन लेती है.........ये अकसर वो सदायें भी
मुमकिन नहीं जिनका, तसव्वुर में आना भी,
लो हुई शाम भी भाड़ी, करवटों में गुज़री रात सारी 
सोचूँ जब भी दिल को बहलाने की !!

होता नहीं आसां.......बिखरे अल्फ़ाज़ों को समेटना,
लगे यूँ जैसे पुराने ज़ख्मों को कुरेदना,
रहता है साझे रिश्तों का मर्तबान खाली, है जरुरत 
नई यादें फ़िर इक बार सजोने की !! 


Monday, June 29, 2020

Dard Ka Sahar....

क़दमों के फासले से बंदिशों के दायरे कम किये
पीछा किया ताउम्र अनकहे लफ्जों का
जाने कब वो किसी और के हो लिए !!

आसां न था जाना उधर मालूम हो ये है "दर्द का शहर"

टूट कर उलझी वादों में रिश्तों की डोरी, 
सूखे जख़्म में सिर्फ़ जलन थी भरी,
ख़्वाब में अकसर दिखें छिपे काले साये, 
गहरे सन्नाटे उसे और करीब लाए !!

इक टुकड़ा बन आज भी सीने में वो नम सा है,
तेरा ग़म जो लगता कभी - कभी मरहम सा है, 
आदतन सोचूँ यू होता तो अच्छा होता,
गर आँखों से ही शख़्स कतल होता !!

पूछा कई दफा बेमन सजी इन आँखों से, 
सोचो तो क्या थे और क्या हो गए हम,
कहाँ खो गए राही तुम रफ़्ता - रफ़्ता,
पढ़ लेते थे बिन कहे ख़ामोशी भी तुम, 
दुनियाँ की दौड़ में चलना भूल गए आहिस्ता आहिस्ता तुम !!

इरादे है फिर से जीने के.........ज़िंदगी ढूँढ तू मुझे लेना,
इक बार फिर अपनी पनाह में रखना,
इस बार सिर्फ मेरे लिए आना !!

Wednesday, June 03, 2020

Yaadon ki baarish.....


यादों की बारिश में......,
भीगा मन लगा है करने फरमाईशें,
बढ़ रहीं मुसलसल इसकी ख़्वाहिशें,
कुछ धुंधले चेहरे बन सवर आए जो थे सिर्फ़ ख्यालों में,

दुनियाँ के इस मजमें में माना तन्हा हर कोना है,
मयकदों से भरा यूहीं नहीं मयखाना है,
जरुरी नहीं हर तराना हो मुक़म्मिल jaana,
आसमां भी लगा यहाँ आधे चाँद की नुमाईश में,

रास न आया कभी तेरे रूह से महरूम होना मुझे,
पाने - खोने के ग़म से पल में उभरना मुझे,
भीगती है आज भी पलकें सर्द पड़े इश्क़ की जुदाई में,

तन्हा पड़ा रहा वजूद दाग़ -ए- उल्फ़त की खाई में,
सोचा रखूँगा मेहफ़ूज़ इसे सुनहरी याद की तरह,
बेसबब हुए चूर - चूर वक़्त की साज़िश में,

मुश्किल रहा पुरानी यादों का सफ़र,
ग़म जो सोया नहीं बताए कोई उसे जगाए किस तरह,
लब हो गए है ख़ामोश अल्फाज़ों की आज़माईश में,

यादों की बारिश में भीग....अकसर ख़ुद से दूर हुए..........  
तेरे इश्क़ की बेरोज़गारी से......फ़िर हम मशहूर हुए..........   


     
  

Friday, May 22, 2020

Mere Ahsaas....

चार दीवारों में क़ैद थी सारी मस्तियाँ,
इज़ाज़त कम थी जीने की फिर भी,

सस्ता लगा साँसों को थामना,

मिली फुर्सद तेरे ग़म को महसूस करने कि,
शिकायतों का दौर चला और रात सोते -सोते रह गई !!

आँखों का सपना नहीं जो पल में खो जाऊ,

खोलूँ पलकें देखूँ चाँद और तारों में गुम हो जाऊ,

दर्द का रिश्ता है ये लिपटा जो अंजुमन से तेरे,

आहिस्ता -आहिस्ता चल ए ज़िंदगी, 

एहसास अभी बाकि है मेरे, 

दौर -ए- इश्क़ में बन चले थे कई हमदर्द

बिगड़ी मुक़द्दर से बात और दूरी हर हम से हो गई !!

ताउम्र लफ्जों का पीछा करता रहा, 

दर्द अल्फ़ाज़ बन कागज़ पर बिछता रहा,

अहद बीतें लम्हों से क्या रखूँ, 

उलझे किरदारों से ज़िंदगी साझा करता रहा, 

पल -पल ढली पूरी ज़िंदगी और हसरतें अधूरी रह गई !!

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