
ख़ुदको बचा रखा था जिससे
वो मंजर आज नग्न आँखों से
देख रही हूँ !!
धूप भी आज मायूस हो बैठी
रोशनी चाँद को बिखेरती
देख रही हूँ !!
टूटा नहीं एक भी तारा
पर आसमां जमीं पर उतरा
देख रही हूँ !!
ख़ामोशी भरी वो लंबी रातें
दिल से जो अब करती है बातें
देख रही हूँ !!
छुटी नहीं हौसलों की डोरी बस
आँखों की बारिश में थोड़ी गीली
देख रही हूँ !!
नम आँखों में भी एक चमक है
टूटकर भी इनमें जीने की ललक है
देख रही हूँ !!
जो खोया वो किस्मत का हिस्सा
जो पाया वो मेरा किस्सा बनते
देख रही हूँ !!
तेरा नाम हवा में घुल सा गया
हर लम्हा जैसे रुक्सा गया
देख रही हूँ !!
"कभी कभी आसूँ भी कहानी कहते है
और वही हमें मजबूत बना देते हैं !!
No comments:
Post a Comment
If you have any doubts let me know.