Wednesday, February 19, 2020

Woh mein thiii...



बिन कुछ कहे...... सब कुछ सहे !

लफ्जों की महफ़िल में जो  💬💬💬

कहते - कहते रह गए ..... वो मैं थी !!



गुज़ार दिए..... कई दिन,महीनें और साल  🙇🙇🙇

जो कट ना सकी रात ...... वो मैं थी !!



मुद्द्ते बीती...... सुहाने ख़्वाब देखें  👀👀👀

सोती रातों में जगा बिस्तर जो रस्ता रोकें .....वो मैं थी !!  



तेरी ज़मीं पर...... कितने आसमान रहे  💥💥💥

ख़्वाबों की फ़सल जो उगा न सकें .... वो मैं थी !!



भीड़ में तन्हाँ..... ख़ुदको जब भी तुमने पाया  💕💕💕

अपनेपन का एहसास जो संग लाया ..... वो मैं थी !! 



मिलते नहीं है अक्स मेरे.... अपनी ही कहानी में  😔😔😔

दास्ताँ तो लिखी तेरी पर ग़ायब  है जिसके निशाँ ...... वो मैं थी !! 


अफ़वाह से तबियत..... तेरी ख़राब थी !

पूछ - पूछ लोगों ने कर दी खड़ी दीवार थी  💔💔💔

सज़ा -ए -इश्क़ कि क्या अकेली ...... मैं ही हक़दार थी  !!



1 comment:

If you have any doubts let me know.

Recent Post :-

Khamoshi Ka Loktantra...,

कहते है ये लोकतंत्र  है....,   जहाँ हर आवाज को मिला,पूरा गगन है,  हर जुबां को मिला,बोलने का अधिकार,  फिर क्यों, लंबी कतार उन शब्दों की है,  ...

Most Loved Hindi Poetry :-