Tuesday, February 04, 2020

Tanhaii....



बेचैनी है...... ख़ामोशी भी छाई है !

आज फिर वो..... तन्हाँ रात आयी है !!

उन रातों का जब भी ज़िक्र होता है........  

भींगे लमहों को आँखों में..........  
                              
                  ...... पिघलने और बिखरने का फ़िक्र होता है !!

तन्हाई के हर हिस्से में......छिपे जज़्बातों के कई किस्से हैं !!

आज कोरे पन्नों में.......  

नया क़िस्सा शामिल कर लिया......सुकून से ख़ुद को महफ़ूज़ कर लिया !!

अंगराई लेती जब भी तन्हाँ रात...... हर करवट में दिलाती वही याद !!

सफ़र रुसवाई का हि सही .......बेहतर था चार पल का साथ !!  

लो आ गई घूँघट डाल फ़िर सामने तन्हाई.........   

                                                ...... करनी है जिसकी फिर से मुँह दिखाई !!




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