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Wednesday, July 15, 2026

Arthavyavastha Ke Aaine Mein Bharat..,

सड़कों पर दौड़ती भीड़ की रफ्तार कहती है,

देश आगे बढ़ रहा, हमारी सरकार हमसे कहती है,

ऊँची - ऊँची इमारतों के शीशों में,

विकास निरंतर आगे बढ़ रहा,

कितने लोग है जिन्हें सच नहीं दिख रहा,

चमक रहे शहरों में मॉल और बाज़ार जहाँ, 

खेतों में सिसक रहा किसान यहाँ,

डिजिटल इंडिया की लहर में, डूब रहा हर एक शहर,

पर मज़दूर के चूल्हें में सुलग रही चिता की दोपहर,

बढ़ती जीडीपी के आँकड़े, शेयर बाज़ार के अंक,

अख़बारों की शान तो बढ़ाते हैं,

पर रोज़गार की तलाश में, कितने युवा भटक जाते हैं,

मॅहगाई की रेखा रोज़, छूती नए आसमानों को,

पर कौन सुनेगा, झुग्गी - झोपड़ी में बसने वाले इंसानों को ?

ज़रा ठहरकर गाँव की पगडंडी से भी पूछो,

सूखी पड़ी खेत की मेड़ों की भी कभी सुध लो,

हर मध्यम वर्ग की ये अनकही ज़ुबानी,

आँखों में उम्मीद और मन में लिए परेशानी,

रोज़ी की तलाश में, भटकते हर युवा की कहानी,

महंगाई की इस आँधी में, कितने सपने रोज़ बिखरते हैं,

हमारी रसोई जैसे निरंतर नए बजट में सिमटते हैं,

अर्थव्यवस्था केवल आँकड़ों का खेल नहीं,

GDP की बढ़ती ऐसी रेखा का कोई मोल नहीं,

डिजिटल सपनों के इस युग में,

आर्थिक तरक्की की दौड़ में, हमें संतुलन बनाना होगा,

मशीनरी के इस दौर में, इंसानी हाथों को ताकत में लाना होगा,

जब तक हर थाली में, रोटी और हर हाथों में काम न होगा, 

कैसे कहें तब तक सोने की चिड़िया का सपना साकार होगा !!  


Saturday, July 04, 2026

Mein Badal Rahi Hoon....,

वक़्त के पन्ने पलट कर इसे जाया न कर, 
इक रोज़ सब बदल जायेगा, 
पर ज़िंदगी की कहानी यूँ ही चलती रहेगी, 
बीते वक़्त की किताब से,
आज भी बेनाम रिश्ते निभा रही हूँ,
मैं बदल रही हूँ........,
माना कुछ ख़्वाब अधूरे रह गए,
कुछ लोग भी रास्तों में बिछड़ गए,
मगर टूटे हुए उन टुकड़ों से, 
मैं अपना ही आसमान गढ़ रही हूँ,
मैं बदल रही हूँ.......,
दिल पर दी गयी किसी की चोट का,
या फिर अपनों की कही कोई बात,
ये बात तो रोज का है मौसमी बरसात का, 
न ज्यादा न कम बस जरुरत भर,
जिंदगी से उसके तौर तरीके सिख रही हूँ, 
मैं बदल रही हूँ.......,
जो बातें कभी आँखों से बह जाती, 
अब अल्फ़ाज़ बनकर उतरती है,
मेरा हर दर्द ख़ामोशी से,
आज एक कविता में सँवरती हैं,
अब शिकायत नहीं आईने से,
उससे रोज़ मुलाकात कर रही हूँ,   
मैं बदल रही हूँ.......,
वक़्त ने बहुत कुछ छीन लिया, 
पर खुदको समझने का हुनर दिया, 
कभी मिलो मुझसे तो पहले सा न ढूँढ़ना,
मैं वहीं हूँ, पर ज्यादा ख़ुद जैसी हो रही हूँ,
"मैं बदल नहीं रही"
बस अब किसी और की नहीं, 
अपनी कहानी लिख रही हूँ !!



Friday, June 26, 2026

Sabse Haseen Alfaaz Ho Tum....,

कैसे बताऊ तुम्हें मेरे लिए तुम क्या हो ?
💕
मस्जिद की पहली अज़ान हो तुम, 
माँगा जिसे रोज़ दुआओं में हम ,
रात सिरहाने खुले थे जो ख़्वाब, 
उसकी हसीं शुरुवात हो तुम !! 
💗
सुनहरी धूप की किरण नभ से,
छन - छन आती जमीं पर,
ज़ेहन के जगते सवालों में, 
अकसर हो जाता हूँ मैं ग़ुम !!
💘
ख़ामोशी से नज़रे पढ़ रही,
सुने लम्हों में लिखी किताब, 
चाँद की इस ठंडी रोशनी में, 
सुकून भरी कोई रात हो तुम !!
💑
दो लफ्जों में बट गए मेरे अक्षर,
जिसका पन्ना तूने पढ़ा नहीं,
वाकिफ़ है यहाँ सब मेरे लहज़े से,
पर इन लफ्ज़ों की पहचान हो तुम !! 
💖
लिखना चाहा तुझे कई दफ़े,
खामोशियों में छुपे जज़्बात हो,
मेरी अधूरी सी ग़ज़ल का, 
सबसे हसीं अल्फ़ाज़ हो तुम !!
💝
न सोना, न चाँदी, न कोई ताज़,
बस मेरे हाथों को तेरे हाथों का साथ,
न मिटने वाली उम्र भर, 
उस मोहब्बत का आगाज़ हो तुम !!
💞💞
लगता है वक़्त आज भी वहीं कहीं अटका है,
जहाँ तेरा नाम मेरे ख्यालों में महका है,
यादें तेरी छेड़ जाती हैं दिल में मीठी शरारतें,
लबों पे बिन वजह ठहरती वो मुस्कान हो तुम,   
मेरी अधूरी सी ग़ज़ल का, 
सबसे हसीं अल्फ़ाज़ हो तुम 💫 💕 💫 💕 💫

Monday, June 15, 2026

Pahli Mausmi Barsaat......,

याद है मुझे.....,
पहली मौसमी बरसात में, मिले थे हम,
वो भीगी सड़कें और वो ठहरी शाम,
गुज़रते लम्हों की महक में, 
बस सपने बुन रहा था मैं ,
तेरे संग यूँ ही आगे निकल गया था मैं,
कैसे कहूँ तुम्हें  ?
अब तक समझ न पाया मैं,
ये मौसम का फसाना था, 
या तेरी बातों का तराना, 
भीग रही थी जहाँ बारिश में दुनियाँ,
मेरा नशा बस तेरा मुस्कुराना था, 
तेरी जुल्फ़ से गिरती बूँदें, 
कुछ देर और जो ठहर जाती, 
तेरे नाम लिखी अधूरी ग़ज़ल मेरी, 
एक और मुक़म्मिल हो जाती, 
वो तेरा पास बैठना और चुप रहना, 
फिर आँखों से रु ब रु कहना, 
उस दिन बारिश ज्यादा तेज थी, 
दिल में शोर भी नया था, 
एक छतरी तो हाथ में थी पर,
साथ एक रिश्ता भी संग चला था, 
भीगी हुई शाम के संग,
जब भी अब सावन दस्तक देगा, 
तेरा चेहरा याद आएगा,
फिर से दिल तेरा हो जाएगा,
मोहब्बत का अगर कोई पहला लफ़्ज़ है,
तो मेरे लिए वो तेरा नाम है,
और अगर इबादत का कोई चेहरा है,
तो यक़ीनन वो तेरा ही अक्स है !!


Friday, June 05, 2026

Woh Saaj Hi Nahi Haiii...,

लिखने को आज अल्फ़ाज़ ही नहीं हैं,
तेरे ख्यालों में गुम हूँ कुछ इस तरह मैं,
गा तो रही हूँ आज भी पर वो साज़ ही नहीं है !!
💕
खुली किताब सा रखा था दिल ने तुझे,
जिसमें बसी थी तुम्हरी हर अदा,  
पढ़ रही हूँ आज भी पर वो अंदाज़ ही नहीं है !!
💕
महफ़िल तो रोज़ लगती है तारों की,
फ़लक पर चाँद भी बिखेरता है चाँदनी,
निहारती आज भी हूँ पर वो नाज़ ही नहीं है !!
💕
तेरे जाने के बाद कुछ यूँ बदली हूँ मैं, 
यकीं नहीं आईने को भी लोगों के बीच, 
हँस तो रही हूँ पर वो आवाज़ ही नहीं है !!
💕
धड़कनें चल रही है साँसें भी बाकि है,
शायद तेरे बिना एहसास ही नहीं,
जी तो रही हूँ पर जीने का आग़ाज़ ही नहीं है !!
💕
आज लिखने को अल्फ़ाज़ ही नहीं है,
जो कभी तेरे नाम से शुरू होती थी,
अब पास न कोई अंत, कोई परवाज़ ही नहीं है !!
💔
              तेरे सिवा अब आता कोई ख़्वाब ही नहीं  !
              तुझे भूल जाने का अब कोई सवाल ही नहीं !!
 
 

Thursday, May 28, 2026

Bhishma : Pratigya Ka Shraap...,

भीष्म.......,
खुद में ही एक गाथा महाभारत की,
एक किरदार ऐसा जो अपने शब्दों से बंधा, 
जिम्मेदारी की जंजीर से जकड़ा, 
ऐसा योद्धा, प्रतिज्ञा बनी जिसकी पहचान, 
भारतवंशी के वो थे शान,
हस्तिनापुर में थी बसी उनकी जान,
और चाह कर भी जो रख न सके,
अपने पूर्वजों का मान,
इच्छा मृत्यु जो लगती है वरदान,
पर इनके लिए पल - पल थी विषपान,

धर्म जानते थे, सत्य पहचानते थे,
न चाहकर भी,अन्याय के संग पड़े रहे, 
राजसिहांसन की मर्यादा में, हाथ बाँधे खड़े रहे,  
एक वचन को जीना आसान नहीं, 
क्योंकि हर प्रतिज्ञा होती वरदान नहीं,

कुरुक्षेत्र में जितना रक़्त बहा, उतना दर्द अंदर सहा, 
गिरते हुए अपनों के साथ, टूटी इनकी भी आस, 
हार कर भी पराजित नहीं और जीतकर भी विजेता नहीं, 
भीष्म केवल एक योद्धा नहीं, 
त्याग और पीड़ा की अमर व्यथा थे, 
जो तीर की शैय्या पर लेटा शरीर नहीं, 
एक युग का टूटा अभिमान थे,
 
जीवनभर जिसने सबका भार उठाया, 
अंत में सिर्फ अकेलापन उनके हाथ आया, 
ये उन फैसलों का हिसाब था, 
जो कर्तव्यों के नाम पर लिया खुद के खिलाफ था,
 
महाभारत ख़त्म हो गई, 
पर भीष्म आज भी ज़िंदा है......, 
हर उस इंसान में, 
जो परिवार जिम्मेदारियों और वचनों के बीच 
धीरे - धीरे खुदको खो देता है !!    
 

Saturday, May 23, 2026

Zara Pass Baitho....,

अरे कहाँ......, 
अफ़रातफ़री में इधर उधर दौड़ रहे,
 
ज़रा पास बैठो......., 
सुन तो लो, हम भी कुछ कह रहे,
 
माना.., वक़्त के बड़े पाबंध हो तुम, 
सुना आजकल कलाई घड़ी में बंद हो तुम,
 
घड़ी तुम्हारे, हर मिनट का हिसाब रखती है, 
क्या..., कैलकुलेटर से ज़िंदगी चलती है,

सुबह से शाम भागते रहते हो तुम, 
कभी काम के पीछे, कभी ज़िम्मेदारियों के नीचे,
 
अपनी हर दौड़ का हिसाब रखते - रखते,
शायद....., मैराथन जीत गए हो तुम,

कभी गौर किया है ?
रात तो वही है, पर आपस में वो बात नहीं,
 
न पहले जैसी बातों पर,आती ये मुस्कान सही,
माना...,वक़्त की तुम्हें बहुत तंगी है,
 
पर ये न भुलो....,
किसी की दुनियाँ के अकेले हक़दार हो तुम,

मंज़िल पाने की होड़ में, 
खो चुके तुम....,खुद को इस भीड़ में,

जिसके साथ था तुम्हें चलना,  
उसे रूककर भी सुनना भूल चुके हो तुम,
  
जो तलाशते है, दुनियाँ में सच्चे रिश्तें,
वो हक़ दे पूछने का मुझे, 
क्या बिखरे मन संभाल सकते हो तुम !!


  
 

Saturday, May 16, 2026

Jarurat Kya Haii...,

एक अधूरी मोहब्बत की गहरी दास्तान 

तेरी खामोशियों को अब, सुनने की जरुरत क्या है,
दिल से जो उतर गए तुम , तुम्हें बुलाने की, 
जरुरत क्या है !!

जब आसूँ ही बयां कर दे, दिल की हर कहानी,
फिर दर्द को लफ़्जों में, बताने की,
जरुरत क्या है !!

तेरी आँखों में कभी, अपना मुकम्मल जहां देखा था, 
अब किसी और को ख़्वाब में, सजाने की,
जरुरत क्या है !!
 
आज तेरे संग महफ़िल में, कई चेहरे नए रिश्ते है, 
पुराने रिश्तों को फिर, आजमाने की, 
जरुरत क्या है !!

तेरी सुनहरी यादों का रंग, आज भी आँखों में बाकि है,
फिर किसी और शख़्स से, दिल लगाने की,
जरुरत क्या है !!

सीख लिया है अब, बिना मरहम के मैंने जीना,
हर जख़्म ज़माने को, अब दिखाने की, 
जरुरत क्या है !!
   
अगर इश्क़ सच्चा है तो, एक दिन तू लौट आएगा,
हर रोज़ तुझे, पुकारने की, 
जरुरत क्या है !!

मैं आज भी तेरे, इंतज़ार में उस मोड़ पर हूँ, 
किसी और राह पर, अनजान संग जाने की, 
जरुरत क्या है !!



Saturday, May 09, 2026

Kuch Ankahein Si....,

ए खुदा तेरे इस जहां में, ऐसे  मंजर क्यों है ,

चेहरे तो हँसते, पर छिपे गहरे समंदर क्यों है !!

ये बस बातों का सिलसिला है, कोई वादा तो नहीं,

फिर हर लफ्ज़ में दिखता, सालों का सफ़र क्यों है !!

मासूम दिल में छुपे हैं, अनकहे से अफ़साने,

लब खामोश हैं, मगर ये आँखों में बवंडर क्यों है !!

ना हाथों में हाथ है , ना आँखों से मुलाक़ात,

फिर भी रातों को ,रहता "हम्म " का इंतज़ार क्यों है !! 

कोई पास होकर भी, बहुत दूर सा लगता है, 💑

पर एक अजनबी, लगता दिल के इतना अंदर क्यों है !!

बस दोस्ती की राह पर, हमने बढ़ाए थे कदम,

फिर उसकी हर बात का, होने लगा असर क्यों है !!

कभी कुछ रिश्ते, बिना नाम के भी खास होते हैं,

पर ये बात कहीं आम न हो, लगता फिर इसे डर क्यों है !!

वो कम बोलता है, मगर महसूस हुआ उसे भी है,

उसकी ख़ामोशी में भी, जिक्र ये बार - बार क्यों है !!

ए खुदा, तेरे इस जहाँ में ये मंजर क्यों है,

छोटी बातों का भी होता, इतना असर क्यों है !! 💕💕💕

Tuesday, April 28, 2026

Num aakhon ka aasmaan.....,

 
ख़ुदको बचा रखा था जिससे 
वो मंजर आज नग्न आँखों से 
देख रही हूँ !!

धूप भी आज मायूस हो बैठी  
रोशनी चाँद को बिखेरती 
देख रही हूँ !!

टूटा नहीं एक भी तारा
पर आसमां जमीं पर उतरा 
देख रही हूँ !!

ख़ामोशी भरी वो लंबी रातें 
दिल से जो अब करती है बातें  
देख रही हूँ !!  

छुटी नहीं हौसलों की डोरी बस
आँखों की बारिश में थोड़ी गीली 
देख रही हूँ !!

नम आँखों में भी एक चमक है 
टूटकर भी इनमें जीने की ललक है
देख रही हूँ !! 

जो खोया वो किस्मत का हिस्सा 
जो पाया वो मेरा किस्सा बनते 
देख रही हूँ !!

तेरा नाम हवा में घुल सा गया 
हर लम्हा जैसे रुक्सा गया 
देख रही हूँ !!

"कभी कभी आसूँ भी कहानी कहते है 
और वही हमें मजबूत बना देते हैं !! 



Thursday, March 20, 2025

Hamare Beech.......,

वो आई थी पास मेरे 
चंद लम्हें थी साथ मेरे 
हाथों में थे हाथ पड़े  
चुड़ियों में थे जज़्बात सजे,
💑
ख़ामोश सज रहे थे लट 
खुल न रहे थे लब 
जैसे बंधे पड़े थे सारे शब्द,
👫
क्या ऐसा भी हो सकता है 
लबों के साथ - साथ 
शब्द भी सुख सकता है,
👨👩
गुमसुम चुपचाप सी 
ऐसी तो न थी पहले खुशी,
👩
जब तक तेरे संग रहा  
नासमझ बन दर्द में भी सर्द रहा,
💕💕   
पल रही पहलू में जो ख़ामोशी है
किसे कहूँ कौन इसका दोषी है,
💗💗  
आँखें है ये तेरी या आईना   
फितरत साफ - साफ झलकते है 
इनके भी होते अपने करिश्में 
सूरज में भी दीखते आज धब्बे है,
👫
होके भी आज तू संग नही  
हाथ तो है पर साथ नही,
लगता है बुत बनने की आई आज अर्ज़ी है 
और बनके काफ़िर कहते है ख़ुदा की मर्ज़ी है !! 
💔💔💔💔   

Saturday, November 16, 2024

Jaa...Rahi Thi Mein

कितना अलबेला है संसार.......,  

उबड़ खाबड़ पगडण्डियाँ  

शरद से सुखी पड़ी है सारी डंडियाँ,

लो हो गई नए रुत की शुरूवात    

लगने लगी फिर ओसों की कतार !! 

नख सिकोड़ती, हर कदम से जमीं को टटोलती,

अक्स को अपने बूँदों में कहीं तलाशती  देखे  

जा रही थी मैं..........,  

आसमां के नीचे, नन्हीं किरणों से बचते

खुद को आँचल में जमीं के सिमटते देखे 

जा रही थी मैं............,

ये सोंधी मिट्टी की खुश्बू , जिसमें इत्र सा जादू

धीरे धीरे ही सही, अपने नसों में घुलते इसे देखे 

जा रही थी मैं............, 

आँखें खोलूँ या बंद रखूँ या और थोड़ा सब्र रखूँ 

इस बगियाँ में आज भी, खुदको ही अकेला देखे

जा रही थी मैं............., 

लगा हर तरफ है होड़, था मगर ये जज़्बातों का शोर

चाहा बहुत रहूँ बेअसर, फिर भी आ जाते है नज़र ये देखे

जा रही थी मैं.............,  

मिली फुर्सत न मुझे मेरे भँवर से, न जाने कब से इनसे घिरी हूँ, 

साल दर साल परत दर परत, सीलन सी इनमें पड़ी खुद को देखे  

जा रही थी मैं.............,   

💝💝💝

Saturday, July 22, 2023

Jadoo.....

 ऐसा लगता है आजकल.......,                      
                           .......  हम थोड़ा ज्यादा फ़िक्र में रहते है ! 

चलते चलते राहों में अकसर,कदम भी हिचकोले लेते है !!

सुनी राहों में भी अब, कहाँ हम अकेले होते है !!!

👫💖👫

अनसुनी हर आहट भी, अब तेरे आने का जिक्र करती है !

आते - जाते हर निशां को ये, बड़े गौर से देखा करती है !!

झिलमिल ही सही पर इन में, तेरे साथ का वो नज़ारा है !!!

💕💑💕

जो ढलती हर शाम हमने साथ, खुली आँखों से निहारा है !

उन तन्हाँ रातों की बात क्या करुँ, बात पुरानी सी लगती है !!
  
आज तो हर कली कहती कहानी, अपनी सी लगती है !!!

💓👌💗

जुगनुँओं से सजी ये रात, जिसमें तारे भी चमकते है !

दिया बाती है दुल्हा दुलहन आज,तो पतंगें बाराती से लगते है !!

क्या इन्हें तुमने, जमीं से पहले मेरी आँखों में उतारा है !! 

संग मेरे रहे तू ,तेरी फिक्र में मैं,
 
और कुछ न मिले इस जहाँ से.........आज से ये भी गवारा है !!! 

 💝💞💝  
 

Thursday, May 20, 2021

Ek Baar Phir Se.....

उन्मुक्त हवाओँ में निराशाओं के पंख कतरती, 
आशाओं की मद्धम सी, लो सुलगाती, 
नयी इच्छाओं से आज.... क़ामिल है मन, 
एक बार फिर से......, 
पतंगों की रेस में...शामिल है मन !!

बरसों बाद मिली इसे राहत कैफ़ियत से, 
आने लगा सुकूँ, अब इबादत से,  
शहर की बेचैनियों से.... होके दूर, 
एक बार फिर से......, 
वीरानों की सिफ़ारिश...करने लगा है मन !!

नजरों संग तलाशती ये ज़र्द मिनारों को,   
जाने क्या कहानी छुपी, इन दीवारों में, 
कब से सोए है साये....इन दरारों में, 
एक बार फिर से......,  
पुकारने की गुज़ारिश....करने लगा है मन !!   

मौत और करवटों पर भरोसा न कर,
शिकायत कर, पर कोई शिक़वा न रख, 
उलझ न बंधनों में...थोड़ी रूह को राहत दे, 
एक बार फिर से......, 
चाहतो के परिंदे उड़ाने को....कहता है मन !! 
  

Thursday, April 15, 2021

Ek Khwaab....

बात है सीधी सी...... पर लगती है पहेली सी, 
जब भी ये आती है, रात करवट में कट जाती है, 
आँखों में बेचैनी की लहरें.......और धड़कन में, 
...........नई हरकत सी भर जाती है !!

💗💗💗
इसे सवारने को.....पड़ी सिलवटें हटाने को,  
जाने कब नज़रे आईना बन जाती है, 
बड़ी पाबन्द होती है पलकें...... फिर भी, 
रुक - रुक कर ये.....दिल को सलाम कर जाती है !!

💝💝💝
बस एक ख़्वाब है तू......... सिर्फ़ एक ख़्वाब....  
फिर क्यों ? ........ तेरे इंतज़ार में, 
ये पलकें टकटकी लगाये, घड़ियाँ निहारती रहती है,
........ तेरे सिर्फ़ जिक्र से,  
आते - जाते हर ख़्वाब को गिला कर जाती है !! 

💖💖💖
नहीं आता समझ मुझे, शिकायत करू या जाने दूँ,
या इन्हें जोड़ नई कहानी बुनूँ.........   
या बाकि सपनों की तरह, इसकी प्यास को भी, 
.......अपने अंदर मेहफ़ूज़ करूँ !!  

Sunday, March 28, 2021

Kagaz Ke Panne...

कागज़ के पन्ने जब देखती हूँ........., 
...... सफ़ेद साफ़, बिलकुल कोरी, 
हवाओं के संग उसकी ठिठौली.....याद दिलाती मुझे, 
अल्हड़, मनचली फिरकी.....पतंगें संग बंधी डोरी जिसकी,
अपने कोरेपन को भरना..... शब्दों के संग खेलना,
पन्ने चाहें अपनेपन से...... हमें बहुत कुछ कहना !!  
बिखेर यूँ खुदके हौसले नहीं.....,
........ देख मेरी तरफ,
कोई फ़र्क नहीं......तुझमें और मुझमें, 
किसमत अपनी तू....... ख़ुद लिख सकता नहीं, 
और मेरे खालीपन का........अपने हाथों कोई ईलाज़ नहीं, 
कब तक रहेगा उलझा....... दामन में लिए अँधेरों को, 
खोल दे मुट्ठी......साँस तो लेने दे चंद लकीरों को !! 
बहुत कर ली पलकें भारी....., 
....... भर चूँकि इनकी प्याली, 
पिछली रात की बारिश में, घुल गई है स्याही, 
रोक न अब 
इसे,..... बाहर आने दे, 
लफ़्जों का हर्फ़ बन,...... हर लाइन पर छाने दे, 
माना जीने के लिए,......
आँखों में सपने जरुरी है,
पर खुली निग़ाह रखने की, देनी पड़ी इन्हें मंजूरी है !! 
आख़िर में क्या कहूँ.........,  
ज़िंदगी की जद्दोज़हद से,......भरने लगा मेरा पन्ना है, 
सुना पड़ा है जो, वो कागज़ नहीं,.....इंसा के दिल का कोना है, 
कुछ यहाँ खोना है, और कुछ हि पाना है !! 
बाकि तो यहीं रह जाना है........., 


Sunday, January 10, 2021

Pahli Bhor.....

दिनों बाद.....फिर वही रात आई है 
बीत रही ये पहर आखिरी
तोड़कर अपनी निंद्रा गहरी,
टिक टिक सुन घड़ी धड़कन की  
बिन बात के पलकें भी फरकि,
एक बार फिर अँधियारे 
को सूरज मात देने वाला है, 
वक़्त का पहिया फिर 
नए सिरे से घूमने वाला है..........,
 
लगा रखी है सर माथे 
कुछ कच्ची कुछ पक्की 
यादों की पगड़ी, 
पास ही है बंधी पड़ी 
कुछ कही कुछ अनकही 
बातों की गठरी, 
दिल चाहें.....   
बंधन इनके न खोलूँ कभी 
चुप रहूँ न इस पर बोलूँ कभी, 
कौन जाने इस साल 
क्या पाकर खोने वाला है,
कुछ पल में ही नई सदी 
का आगाज़ होने वाला है.........,
   
ओढ़े बैठा है मन क्यों 
तू वही पुराने मैले कुचैले 
सोच से सिले चादर को 
निकाल इस मंथन से इसको 
कदम बढ़ा नज़रे उठा 
देख पूरब की ओर     
सुनहरे लिबास में लिपटा  
ओस में धुला फिर निकला नए साल की पहली भोर..........,  

Saturday, October 24, 2020

Tere Sang......

रोज़ संग तेरे जीने के
इक वजह मिल जाती है
बेवजह जिसतरह 
खुद की धुंध में 
हर शाम ढल जाती है,,,,,,   
मधुर संगीत सुनाती 
जुगनू थकी रात को 
अपने परों से सहलाती है    
खिली सुबह के आने का 
पैगाम उन्हें 
हँसकर दे जाती है,,,,,,,,,
तीखी पहली किरण से  
चाहूँ केशू सवारना 
पानी को दर्पण समझ 
सोई रंगत निखारना 
अपनी थपकियों से आँखों 
को भी जगा जाती है,,,,,,,,
मलहार गाती हवा जब दबे 
पांव छू कर गुज़र जाती है 
कहती है ये नज़रे........  
है कितनी रौनके दफ़न इनमें 
पलकों से पल वो छाँट ले  
नज़रों की जमीं पर देख
कभी अश्कों से भी काम ले
बेवजह की इसकी बारिश 
जाते - जाते होठों को वजह 
चमक के दे जाती है,,,,,,,,,, 
अनचाही लकीरें जब भी  
किस्मत के रूबरू आती है  
लड़ कर अकसर 
हथेली में ही रह जाती है  
ख़ौफ़ नहीं जिनको 
तक़दीर -ए- रुख का वहीं 
लकीरों से उभरकर 
ज़िंदगी पर छा जाते है,,,,,,,,,, 
  
 

Wednesday, September 30, 2020

Dekh Rahi Hoon Mein.....

दिनों बाद लगा एक ख़्वाब देख रही हूँ मैं.......
पल को दिन...... दिन को साल में 
वक़्त की खाल ओढ़े 
सूरज को पल - पल 
बदलते अपनी चाल देख रही हूँ मैं........,
 💫💫
पहाड़ों को करते पहरेदारी 
अंबर को चुराते लाली
तिरछी हरी घास पर लेटे
बेख़ौफ़ इस जहां से होके  
फिर एक बार 
आँखों से वफ़ा खोज रही हूँ मैं...........,
 💫💫  
भोर हुई सूरज निकला 
ओस के पाँव ने जमीं कुरेदा 
सोंधी - सोंधी ख़ुश्बू बिखरी 
हर कली ने अपना पट खोला
बांधा कई बार इन नज़ारों ने 
पर लगता है 
जमीं से नाता आज जोड़ रही हूँ मैं........, 
💫💫 
बंदिशों के घेरों को 
पार कर निकले थे  
मन के परिंदे 
बेपरवाह हो उड़ चले थे
तेज़ हवाओं को कर अनदेखा
ऊपर बादलों के बीच जा बैठे थे 
सुने आसमां के आँगन को 
खाली पड़े मन के गागर को 
फ़िर बूँदों से दामन भरने की सोच रही हूँ मैं.......,
💫💫  
मोल नहीं इस दृश्य का 
यहाँ मन का विकार भी 
बेकार हुआ
भरी दुपहरी में जब 
अँधियारा उजाले से 
पार हुआ
आओं अपने परों को खोलें     
और आसमां के पर् निचोड़े 
पहली दफ़े 
बारिश में आज 
ख़ुदके और जमीं के भरते ज़ख़्म देख रही हूँ मैं.......,   
 

Thursday, September 17, 2020

Mere Hisse Ki Dhoop..

"आईने को इतनी समझ तो आए 

 मेरे साये को ख़ुद पहचान जाए "


सिमटी यादों का एक पुलिंदा है ज़िंदगी,
सिलसिला न छोड़ इसे समेटने का,
इसके लिखें हर हर्फ़ से झलकती है संजीदिगी !!

गुज़रते वक़्त ने नवाज़ा मुझे असीम तज़ुरबों से, 
पर ज़िंदगी से अदायेगी में,
इल्म हुआ ख़ुद से तार्रुफ़ नहीं बरसों से !!

वक़्त के हाथ से छूटी फ़िर इक तस्वीर पुरानी, 
मकां तो साफ दिखा आँखों का, 
मगर चेहरे पर छाई थी पहली सी वीरानी !!

ये बात तब की है जब कुछ न था पनाह में, 
मेरे हिस्से की धूप भी, 
बिछा रखें थे तेरी राह में !!

चिलचिलाती धूप में पलकें जली इंतज़ार में,
दोष रोशनी का नहीं वो आँखें है, 
जो चुपचाप बैठ सारी रात काटी ख़्वाब में !!

ढ़ली शाम सी नरमी आ गई मेरे जज़्बातों में,
रहने दे नम अनसुलझा इन्हें, 
हर लफ्ज़ उलझे है एक दूसरे को सुलझाने में !!
   
इन बूढ़ी साखों ने झेलें ख़ामोशी से कई पतझड़, 
अब मेरे हिस्सें की धूप, 
इनपर भी थोड़ी आने दे..........!!!   
  

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