Thursday, May 20, 2021

Ek Baar Phir Se.....

उन्मुक्त हवाओँ में निराशाओं के पंख कतरती, 
आशाओं की मद्धम सी, लो सुलगाती, 
नयी इच्छाओं से आज.... क़ामिल है मन, 
एक बार फिर से......, 
पतंगों की रेस में...शामिल है मन !!

बरसों बाद मिली इसे राहत कैफ़ियत से, 
आने लगा सुकूँ, अब इबादत से,  
शहर की बेचैनियों से.... होके दूर, 
एक बार फिर से......, 
वीरानों की सिफ़ारिश...करने लगा है मन !!

नजरों संग तलाशती ये ज़र्द मिनारों को,   
जाने क्या कहानी छुपी, इन दीवारों में, 
कब से सोए है साये....इन दरारों में, 
एक बार फिर से......,  
पुकारने की गुज़ारिश....करने लगा है मन !!   

मौत और करवटों पर भरोसा न कर,
शिकायत कर, पर कोई शिक़वा न रख, 
उलझ न बंधनों में...थोड़ी रूह को राहत दे, 
एक बार फिर से......, 
चाहतो के परिंदे उड़ाने को....कहता है मन !! 
  

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