Wednesday, September 30, 2020

Dekh Rahi Hoon Mein.....

दिनों बाद लगा एक ख़्वाब देख रही हूँ मैं.......
पल को दिन...... दिन को साल में 
वक़्त की खाल ओढ़े 
सूरज को पल - पल 
बदलते अपनी चाल देख रही हूँ मैं........,
 💫💫
पहाड़ों को करते पहरेदारी 
अंबर को चुराते लाली
तिरछी हरी घास पर लेटे
बेख़ौफ़ इस जहां से होके  
फिर एक बार 
आँखों से वफ़ा खोज रही हूँ मैं...........,
 💫💫  
भोर हुई सूरज निकला 
ओस के पाँव ने जमीं कुरेदा 
सोंधी - सोंधी ख़ुश्बू बिखरी 
हर कली ने अपना पट खोला
बांधा कई बार इन नज़ारों ने 
पर लगता है 
जमीं से नाता आज जोड़ रही हूँ मैं........, 
💫💫 
बंदिशों के घेरों को 
पार कर निकले थे  
मन के परिंदे 
बेपरवाह हो उड़ चले थे
तेज़ हवाओं को कर अनदेखा
ऊपर बादलों के बीच जा बैठे थे 
सुने आसमां के आँगन को 
खाली पड़े मन के गागर को 
फ़िर बूँदों से दामन भरने की सोच रही हूँ मैं.......,
💫💫  
मोल नहीं इस दृश्य का 
यहाँ मन का विकार भी 
बेकार हुआ
भरी दुपहरी में जब 
अँधियारा उजाले से 
पार हुआ
आओं अपने परों को खोलें     
और आसमां के पर् निचोड़े 
पहली दफ़े 
बारिश में आज 
ख़ुदके और जमीं के भरते ज़ख़्म देख रही हूँ मैं.......,   
 

Thursday, September 17, 2020

Mere Hisse Ki Dhoop..

"आईने को इतनी समझ तो आए 

 मेरे साये को ख़ुद पहचान जाए "


सिमटी यादों का एक पुलिंदा है ज़िंदगी,
सिलसिला न छोड़ इसे समेटने का,
इसके लिखें हर हर्फ़ से झलकती है संजीदिगी !!

गुज़रते वक़्त ने नवाज़ा मुझे असीम तज़ुरबों से, 
पर ज़िंदगी से अदायेगी में,
इल्म हुआ ख़ुद से तार्रुफ़ नहीं बरसों से !!

वक़्त के हाथ से छूटी फ़िर इक तस्वीर पुरानी, 
मकां तो साफ दिखा आँखों का, 
मगर चेहरे पर छाई थी पहली सी वीरानी !!

ये बात तब की है जब कुछ न था पनाह में, 
मेरे हिस्से की धूप भी, 
बिछा रखें थे तेरी राह में !!

चिलचिलाती धूप में पलकें जली इंतज़ार में,
दोष रोशनी का नहीं वो आँखें है, 
जो चुपचाप बैठ सारी रात काटी ख़्वाब में !!

ढ़ली शाम सी नरमी आ गई मेरे जज़्बातों में,
रहने दे नम अनसुलझा इन्हें, 
हर लफ्ज़ उलझे है एक दूसरे को सुलझाने में !!
   
इन बूढ़ी साखों ने झेलें ख़ामोशी से कई पतझड़, 
अब मेरे हिस्सें की धूप, 
इनपर भी थोड़ी आने दे..........!!!   
  

Thursday, September 10, 2020

Chal Wahan Jaate Hain....

चल वहाँ जाते है..........,
  
जहाँ खुली बाहें पसारे ये प्रकृति हमें पुकारे, 
आँखों की प्यास बुझाने को ओस नित करे इशारे, 
इनकी पाक पनाह में आओ फ़िर से 
सारे जहां को हम भूल जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
  
जिन पहाड़ों की ओट से जमीं को झाँकती 
हर रोज सुबह नज़र आती है,
सूरज से मर्म पाते हि जहाँ सूखे पत्ते भी 
हरे फ़र्श पर सोने सा चमक जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
  
नीले आँचल की छाँव में लेटकर सारी 
क़ायनात एक नज़र आती है,
नभ के तारें जहाँ अकसर जमीं हाथ बढ़ा तोड़ जाती है,
दुनियाँ से कटकर जहाँ खुद से जुड़ हम जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,  

हवाओं की बदली रुख से रुखसत 
होती जहाँ बरसात है, जिसकी हर बूँद में 
अपना अक्स नज़र आता साफ़ है, 
बादलों के बीच जाकर चलो हम नदियों में नहाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,

ख़्वाब देखे जहाँ आसमां संग होने की जमीं, 
सतरंगी सपने जहाँ रोज खिलाए हर कली,
सावन की राह में कलियाँ जहाँ गुलमोहर सी हो सजी,
बारिश की सुगबुगाहट जहाँ आहट सावन के दे जाते है !! 
चल वहाँ जाते है..........,

Sunday, September 06, 2020

Kahan Dur Hoon Mein.....

कितने अदब से बैठे है ये ईट की दीवारों में,

देखने चाँद भी निकला है इन्हें दिन के उजाले में !!

मिसाल इश्क़ की कहाँ से दूँ इस ज़माने में,


कि सारे ग़म है खोने के जो पाये इसे भुलाने में !!

मुस्कराहट की सलीबों पर चढ़ा हर आँसू,


ज़िंदगी यूँ गुज़री कि मिलती है अब मिसालों में !!

दिन - रात कब बीते रोते हुए मुखड़ों को हँसाने में,


मोहताज़ हुई ज़िंदगी और कि अधूरी ख़्वाहिशों में !! 

सुकूं के पल बिखरे थे छोटे - छोटे तराशे में, 


वक़्त थमा नही ज़िंदगी निकली ग़ैरों की बादशाही में !!

इबादत की, हर दरगाह, हर शिवालों में, 


इलम हुआ फ़रिश्ते मिलते है आजकल सिर्फ हवालों में !!

बिछड़ के मुझसे साया आज तेरे आस पास फैला है,


अंदर झाँक के देख टूटा हूँ पर कहाँ तुझसे दूर हूँ मैं !!






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