आईने में दिखा चाँद फ़िर ओझिल हो गया
चढ़ा ही था आँखों में वो शख्स बन के नशा,
बदले रुत में नज़रों से दरिया हो उतर भी गया !!
चढ़ा ही था आँखों में वो शख्स बन के नशा,
बदले रुत में नज़रों से दरिया हो उतर भी गया !!
सूरज की आँच देख चेहरा निखर सा गया
बदगुमां रहा सारी उम्र जिस रोशनी से,
आज ख़ुद के साए की आहट से दिल डर सा गया !!
बदगुमां रहा सारी उम्र जिस रोशनी से,
आज ख़ुद के साए की आहट से दिल डर सा गया !!
हज़ारों ख़्वाब का ख़िर्मन बिखर सा गया
तोड़ती रही पल - पल न जाने किसकी अना इनको,
हवा बन मिरे क़रीब से जाने कब वो गुज़र भी गया !!
तोड़ती रही पल - पल न जाने किसकी अना इनको,
हवा बन मिरे क़रीब से जाने कब वो गुज़र भी गया !!
किसी के गुमां के सहरा में दिल ख़ाक सा उड़ गया
उल्ट गई तदवीरें कहीं न फिर इलाज़ हुआ,
आख़िर में बीमार -ए- दिल को बदनाम कर ही गया !!
यक़ीन होता नहीं पर लब्ज़ अब इश्तिहार हो गया
जहाँ दिखें धनक के रंग कई वो यहाँ अख़बार हो गया,
सुजूद तलाशती रूहों को सुकूं से कोसों दूर कर गया !!
उल्ट गई तदवीरें कहीं न फिर इलाज़ हुआ,
आख़िर में बीमार -ए- दिल को बदनाम कर ही गया !!
यक़ीन होता नहीं पर लब्ज़ अब इश्तिहार हो गया
जहाँ दिखें धनक के रंग कई वो यहाँ अख़बार हो गया,
सुजूद तलाशती रूहों को सुकूं से कोसों दूर कर गया !!

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