Sunday, September 06, 2020

Kahan Dur Hoon Mein.....

कितने अदब से बैठे है ये ईट की दीवारों में,

देखने चाँद भी निकला है इन्हें दिन के उजाले में !!

मिसाल इश्क़ की कहाँ से दूँ इस ज़माने में,


कि सारे ग़म है खोने के जो पाये इसे भुलाने में !!

मुस्कराहट की सलीबों पर चढ़ा हर आँसू,


ज़िंदगी यूँ गुज़री कि मिलती है अब मिसालों में !!

दिन - रात कब बीते रोते हुए मुखड़ों को हँसाने में,


मोहताज़ हुई ज़िंदगी और कि अधूरी ख़्वाहिशों में !! 

सुकूं के पल बिखरे थे छोटे - छोटे तराशे में, 


वक़्त थमा नही ज़िंदगी निकली ग़ैरों की बादशाही में !!

इबादत की, हर दरगाह, हर शिवालों में, 


इलम हुआ फ़रिश्ते मिलते है आजकल सिर्फ हवालों में !!

बिछड़ के मुझसे साया आज तेरे आस पास फैला है,


अंदर झाँक के देख टूटा हूँ पर कहाँ तुझसे दूर हूँ मैं !!






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