चल वहाँ जाते है..........,
जहाँ खुली बाहें पसारे ये प्रकृति हमें पुकारे,
आँखों की प्यास बुझाने को ओस नित करे इशारे,
इनकी पाक पनाह में आओ फ़िर से
सारे जहां को हम भूल जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
जिन पहाड़ों की ओट से जमीं को झाँकती
हर रोज सुबह नज़र आती है,
सूरज से मर्म पाते हि जहाँ सूखे पत्ते भी
हरे फ़र्श पर सोने सा चमक जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
नीले आँचल की छाँव में लेटकर सारी
क़ायनात एक नज़र आती है,
नभ के तारें जहाँ अकसर जमीं हाथ बढ़ा तोड़ जाती है,
दुनियाँ से कटकर जहाँ खुद से जुड़ हम जाते है !!
जहाँ खुली बाहें पसारे ये प्रकृति हमें पुकारे,
आँखों की प्यास बुझाने को ओस नित करे इशारे,
इनकी पाक पनाह में आओ फ़िर से
सारे जहां को हम भूल जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
जिन पहाड़ों की ओट से जमीं को झाँकती
हर रोज सुबह नज़र आती है,
सूरज से मर्म पाते हि जहाँ सूखे पत्ते भी
हरे फ़र्श पर सोने सा चमक जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
नीले आँचल की छाँव में लेटकर सारी
क़ायनात एक नज़र आती है,
नभ के तारें जहाँ अकसर जमीं हाथ बढ़ा तोड़ जाती है,
दुनियाँ से कटकर जहाँ खुद से जुड़ हम जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
हवाओं की बदली रुख से रुखसत
होती जहाँ बरसात है, जिसकी हर बूँद में
अपना अक्स नज़र आता साफ़ है,
बादलों के बीच जाकर चलो हम नदियों में नहाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
ख़्वाब देखे जहाँ आसमां संग होने की जमीं,
सतरंगी सपने जहाँ रोज खिलाए हर कली,
सावन की राह में कलियाँ जहाँ गुलमोहर सी हो सजी,
बारिश की सुगबुगाहट जहाँ आहट सावन के दे जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
हवाओं की बदली रुख से रुखसत
होती जहाँ बरसात है, जिसकी हर बूँद में
अपना अक्स नज़र आता साफ़ है,
बादलों के बीच जाकर चलो हम नदियों में नहाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,
ख़्वाब देखे जहाँ आसमां संग होने की जमीं,
सतरंगी सपने जहाँ रोज खिलाए हर कली,
सावन की राह में कलियाँ जहाँ गुलमोहर सी हो सजी,
बारिश की सुगबुगाहट जहाँ आहट सावन के दे जाते है !!
चल वहाँ जाते है..........,

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