Wednesday, June 03, 2020

Yaadon ki baarish.....


यादों की बारिश में......,
भीगा मन लगा है करने फरमाईशें,
बढ़ रहीं मुसलसल इसकी ख़्वाहिशें,
कुछ धुंधले चेहरे बन सवर आए जो थे सिर्फ़ ख्यालों में,

दुनियाँ के इस मजमें में माना तन्हा हर कोना है,
मयकदों से भरा यूहीं नहीं मयखाना है,
जरुरी नहीं हर तराना हो मुक़म्मिल jaana,
आसमां भी लगा यहाँ आधे चाँद की नुमाईश में,

रास न आया कभी तेरे रूह से महरूम होना मुझे,
पाने - खोने के ग़म से पल में उभरना मुझे,
भीगती है आज भी पलकें सर्द पड़े इश्क़ की जुदाई में,

तन्हा पड़ा रहा वजूद दाग़ -ए- उल्फ़त की खाई में,
सोचा रखूँगा मेहफ़ूज़ इसे सुनहरी याद की तरह,
बेसबब हुए चूर - चूर वक़्त की साज़िश में,

मुश्किल रहा पुरानी यादों का सफ़र,
ग़म जो सोया नहीं बताए कोई उसे जगाए किस तरह,
लब हो गए है ख़ामोश अल्फाज़ों की आज़माईश में,

यादों की बारिश में भीग....अकसर ख़ुद से दूर हुए..........  
तेरे इश्क़ की बेरोज़गारी से......फ़िर हम मशहूर हुए..........   


     
  

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