Wednesday, June 17, 2020

Yeh Raat.....

कितना गहरा अँधेरा उभरा 
सुनहरी शाम ढली नज़र आया 
फ़िर मन का सूना कमरा 
सूखे - सूखे जज़्बात
अधूरे बंद पड़े ख़्वाब
तन्हाई की चादर ओढे 
पल - पल सरकती ये रात..........

क़तार लंबी है Shelf पर रखें किताबों की
कमी नहीं जिसमें अल्फ़ाज़ों की 
टूटे रिश्तें जोड़ू कैसे ?
अपने सपने पहचानों ऐसे !
भरे पड़े है पन्ने ऐसे कई जवाबों से
सुकूँ कहाँ लेकिन स्याही के 
इस ताने बाने से  
पल - पल समझाती ये रात..........

शिकायती नज़रों की फ़ेरिश्त से
ख़ुदको दूर रख चार लम्हें 
अपनों पर भी बर्बाद कर 
छिपे सवाल जो है तेरे उसे ज़ाहिर कर 
ज़ियादा की तवक़्क़ो नहीं 
बस आबो -ओ- दाना का ख्याल कर
पल - पल सिखाती ये रात...........

कहते है चंद दिनों का ये सफ़र 
बसते है मकां में चंद लोग 
भरोसा न कर ज़िंदगी का  
मरने लगे है इक दूसरे की वफ़ा में लोग 
दिलचस्प बात है ख़ता करके 
दिखाते ख़ुदको कैसे शर्मिंदा है ये लोग    
पल - पल कहती ये रात.......... 
  

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