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Sunday, May 24, 2020

Mann Ka Bojh...

उम्मीद का दीया जला बूढ़ी आँखें देखें रस्ता,
छवि अपनों की हर राहगीर में तलाशती......,

मुंडेर पर बैठ मायूस परिंदे को आहती, 
हर आहट पे नज़रे जैसे चौखट सवारती !!

झुकी कमर, लदी पलकें, झुर्रियाँ में छिपी, 
ज़िम्मेदारी की परतें.........,

अपनों की "बोझ" से दोहरा हुआ ज़िस्म,  
फ़िर भी वो हँसती रही,
सबकी ज़िंदगी सुकून से,
यूँ ही नहीं गुज़रती रही......, 

क़ैद जिसमें तेरे बचपन की तिजोड़ी है,
खोली आज मैंने फिर वो अँधेरी कोठरी है........,

बेज़ान पड़ी दीवारों से गूँज रही तेरी तोतली बोली,
टूटी सुई देख लगे, वक़्त ठहरी आज भी वहीं......
जैसे - तैसे दिन गुज़रते, पर हर साँझ लगे गहरी बड़ी  !!

यूँ तो बेकरवट बीती कई रातें, आधी गुज़री, 
और आधी निहार कर काटी........., 

पहलू में रख जिसे कई दिन फ़ाक़े बिताये, 
सोचा न था, आज वो आँचल झुलसा होगा...... 
कभी "माँ" को भी, एक फरियादी बनना होगा !!





Saturday, March 07, 2020

Naari....jeevan ek sangharsh...


Woman's Day यानि "8 March" एक औरत के विस्तृत
रूप का चिंतन करने का दिन उसके 365 दिन और 24 *7 घंटे
चलने वाले काम का बातों से देने वाले  Reward दिन  🙏

"इक बात कहूँ गर सच मानों तुम...साल,घंटे,दिन को छोड़ो 
इक पल काट सको बिन उनके.....तो जानें हम"



हर पिता कहे, ...... तू जान हमारी हैं,

किसी की ज़िम्मेदारी,.....पर तू हमारी दुलारी हैं !!

माना नया ज़माना है,.....  नए रिश्तों का.... नया पैमाना है,

जिसका कोई मोल नहीं,..... वो अमूल्य तू गहना हैं,
  
ख़ुदको आज़मा मत,..... अपने हित के लिए.....तुझे ही लड़ना है !!

अकेली राहों में संभल कर,...... ख़ुद के बल चलना है, 

किसी और के लिए नहीं,.....पहले ख़ुद के लिए जीना हैं !!

वक़्त की आँधी में धूल उड़ेंगे,..... तेरी आँखों में,

उलझ न इन भूल,.... भरी धूल में.... हिम्मत के छीटों से 

तो....... तेरी बरसों की यारी हैं !!

रब ने इस फ़ितरत से,.... ढाला तुम्हें,....मौन बगिया में,

फूल खिलाने का...... जिम्मा दे..... डाला तुम्हेँ  !!

तू हि इस सृष्टि की जननी है,...... मान तेरा इस धरा पे भी भारी है ........ शान से कह कि तू नारी हैं !!

Friday, January 31, 2020

Aurat...dost ya dushman



महफ़िल में जब भी बात होती है,.....ये बात बहुत आम होती है !

शुरू कही से भी हो,..... ख़त्म औरत पर बात होती है 😍😍

फ़िर लगी यारों की महफ़िल,..... निकली भड़ास दिल की !

देखूँ सूरत आईने में,....सिरत क्यों,.....दिखने लगती है 😊😊  

यार,... औरत ही औरत की दुश्मन क्यों लगती है !!

सवाल में इतनी गहराई है,.... नाप सके न आज तक जिसे खुदाई है 😖😖

तुमने आज अगर गुहार लगाई है,.....तो सुन,... ये सच्चाई है !!

औरत त्याग की मूरत होती है,.....खुदको को छोड़ सबकी क़द्र होती है 😐😐

माँ होकर भी,.....एक माँ का दर्द करती अनदेखा है,....बेटी होकर भी बेटी से ही पंगा है !!

कहने को तो परिवार की धुरी है,....समझना ये जरुरी है नारी - नारी के बिन अधूरी है 😊😊

अपना हक़ और मंज़िल पाना आसान हो जाए,..... अगर औरत हि औरत की दोस्त हो जाए !! 

अगर सच हो ये बातें तो विचार करो,.... खुदके जैसा दूसरों संग व्यवहार करो 💕💕

वर्ना,....... हाथ जोड़े हूँ,.... मुझे माफ़ करो  🙏🙏🙏

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