Saturday, July 04, 2026

Mein Badal Rahi Hoon....,

वक़्त के पन्ने पलट कर इसे जाया न कर, 
इक रोज़ सब बदल जायेगा, 
पर ज़िंदगी की कहानी यूँ ही चलती रहेगी, 
बीते वक़्त की किताब से,
आज भी बेनाम रिश्ते निभा रही हूँ,
मैं बदल रही हूँ........,
माना कुछ ख़्वाब अधूरे रह गए,
कुछ लोग भी रास्तों में बिछड़ गए,
मगर टूटे हुए उन टुकड़ों से, 
मैं अपना ही आसमान गढ़ रही हूँ,
मैं बदल रही हूँ.......,
दिल पर दी गयी किसी की चोट का,
या फिर अपनों की कही कोई बात,
ये बात तो रोज का है मौसमी बरसात का, 
न ज्यादा न कम बस जरुरत भर,
जिंदगी से उसके तौर तरीके सिख रही हूँ, 
मैं बदल रही हूँ.......,
जो बातें कभी आँखों से बह जाती, 
अब अल्फ़ाज़ बनकर उतरती है,
मेरा हर दर्द ख़ामोशी से,
आज एक कविता में सँवरती हैं,
अब शिकायत नहीं आईने से,
उससे रोज़ मुलाकात कर रही हूँ,   
मैं बदल रही हूँ.......,
वक़्त ने बहुत कुछ छीन लिया, 
पर खुदको समझने का हुनर दिया, 
कभी मिलो मुझसे तो पहले सा न ढूँढ़ना,
मैं वहीं हूँ, पर ज्यादा ख़ुद जैसी हो रही हूँ,
"मैं बदल नहीं रही"
बस अब किसी और की नहीं, 
अपनी कहानी लिख रही हूँ !!



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