कितनी रूमानी रातें यूँ ही छत पर गुज़री
कभी चहल कदमी में....कभी नंगी फ़र्श पर लेटे
आसमां को निहारते कहा कई दफ़ा
मौसम -ए- हालात कैसा भी हो गुरेज़ नहीं
कर सकूँ अपनी बेचैनियों की हिफाज़त इतनी मोहलत तो दो !!
सुबह की पहली किरण से पलकें है भाड़ी
इनपर भी हो कभी ओस की बारिश
सोयी नहीं कब से नगमें हमारी
छेड़ दे ज़रा वो धुन.....जो लगे तुझे प्यारी
इन गीतों की तरह आधे - अधूरे ख़्वाब है
इन्हें फिर आँखों में सजोने की इजाज़त तो दो !!
धीमी - धीमी पिछली रात संग मेरे जो नज़म जली
सुबह से मिलने भोर तक थी मेरे पास रुकी
फर्श पर अभी कतरन सी बिछी और थोड़ी सी राख़ बची
कर दूँ इसे मिट्टी के हवाले पहले जख़्मों पर मलने तो दो !!
आया है सावन..... मौसम लिए बारिश
जमीं से मिलने की हो रही फिर से साज़िश
दिल करता है मैं भी कर दूँ लम्हों को
लफ़्ज़ों में बीत जाने की गुज़ारिश
गीली पड़ी है दिल की जमीं इनमें ख़्वाब के बीज बोने तो दो !!
कभी चहल कदमी में....कभी नंगी फ़र्श पर लेटे
आसमां को निहारते कहा कई दफ़ा
मौसम -ए- हालात कैसा भी हो गुरेज़ नहीं
कर सकूँ अपनी बेचैनियों की हिफाज़त इतनी मोहलत तो दो !!
सुबह की पहली किरण से पलकें है भाड़ी
इनपर भी हो कभी ओस की बारिश
सोयी नहीं कब से नगमें हमारी
छेड़ दे ज़रा वो धुन.....जो लगे तुझे प्यारी
इन गीतों की तरह आधे - अधूरे ख़्वाब है
इन्हें फिर आँखों में सजोने की इजाज़त तो दो !!
धीमी - धीमी पिछली रात संग मेरे जो नज़म जली
सुबह से मिलने भोर तक थी मेरे पास रुकी
फर्श पर अभी कतरन सी बिछी और थोड़ी सी राख़ बची
कर दूँ इसे मिट्टी के हवाले पहले जख़्मों पर मलने तो दो !!
आया है सावन..... मौसम लिए बारिश
जमीं से मिलने की हो रही फिर से साज़िश
दिल करता है मैं भी कर दूँ लम्हों को
लफ़्ज़ों में बीत जाने की गुज़ारिश
गीली पड़ी है दिल की जमीं इनमें ख़्वाब के बीज बोने तो दो !!



