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Wednesday, April 01, 2020

Mere Ram.....

उगते सूरज की, किरणों में तू ,
आरंभ भी तू......अंत भी तू  


सुख में भूल, दर्द में जाना जिसे,
नित जग, जिसका नाम भजे,
कहते हैं सब राम उसे........,

तू है गगन से, पाताल तक, 
जीवन थमा, तेरे हि आधार पर,
परचम तेरा, क्षितिज के पार तक,
तू है अल्प से अल्पविराम तक........, 

तेरे इशारे बिन, कुछ चला नहीं, 
धूप छाँव में भी, ढला नही,  
वो सत्य कैसा ?
जिसमें तेरा नाम नहीं........., 

सतरंगी ये दुनियाँ, अपनी आँखें खोले,
हल्की मुस्कान जब, तेरे अधरों को घेरे,
बुझे तारे भी जाग उठे, फ़न जब शेषनाग खोले,
सारा जग जय श्री राम बोले........,

तुलसी कहे........ दूजा न अब कोई राम होगा, 
जिसका अवध में, इतना नाम होगा,
हृदये में लगा, जिसके धाम होगा, 
वहीं बसा श्री राम होगा............., 




Saturday, February 22, 2020

O kanha...


ओ  कान्हा.......,


जानें क्या सूझी तुझको....प्रीत क्यों जगाई मुझको,


तू भी तो तरपा होगा..... राधे दर्शन को तरसा होगा !


मन बनाकर.....कई दफ़े ख़ुद पर बरसा होगा !!


देख छवि आँखों में तेरी....छलके आँसू पलकों से मेरी,


सुध - बुध सबने खोई...... सुन बाँसुरी की धुन तेरी !!


राधा तेरी जया है .....मीरा अदभुत माया की काया है,


जोगन से जग करे सवाल ..... बता तेरा जहां में कौन है ?


मुस्कुरा कर आज भी ...... कुंज बिहारी खड़े क्यों मौन हैं !!


जग से न अब आशा है.....बदल गयी प्रेम की परिभाषा है,


देखो तो लगता है...... हर तरफ़ चारों धाम लगे हैं ! 


श्याम दिल में नहीं..... ईट की दीवारों में क़ैद घनश्याम पड़े है !!

Monday, December 30, 2019

Aye...khuda...





हर रूह में तू बसता है ...ऐ ख़ुदा ,फिर क्यों रूह से जिश्म होते है जुदा,


ढूँढा तुझे मंदिर ,मस्जिद के अंदर,....जब भी पाया खुदको बीच समंदर !!                                 

                                  आयत का हर लब्ज़,याद मुझे ज़ुबानी हैं !                                

                                 फुर्सत में बैठ कभी,तुझे भी अपनी सुनानी हैं !!


माना फ़रयादी की भीड़ बहुत है,सबको अपनी  प्यास बहुत है,


एक सी यहाँ जिंदगानी है,ज़ख्मों से ज्यादा गहरे घाव की कहानी हैं !!


तौफा दिया ज़िंदगी का तूने,जिसके कई पन्ने है अनकहे - अनसुने, 


ज़िंदगी तो है पर न वो रवानी है,जो सुना सकूं ना ऐसी कोई कहानी है !!


               "नाज़ तुझपे फिर भी ज़िंदगानी है,..समझते -समझते तुझे गुज़र जानी हैं "


Tuesday, December 17, 2019

Saarthi....jeevan ka

                            "Tu hi sathi..aur saarthi bhi.."



Jab bhi zindgi ke haadso se hataash hua.....teri aazmaish se niraash hua...,

Dhunda tujhe...har sahar, har mandir ,har dar per...tujhse pahle lambi line ka shikar hua...,

Itne roop dekhe tere.... aur kitne naamo se do chaar hua .....,

Kahi tu Ram aur.....kahi tu Hanuman hua..,

Aakhe thi num aur band....jab baithe the dar par tere..... darshan ko hum..,

Ek pal ko yeh ahsaash hua....tu kuch kah raha.....dil ko yeh mahsush hua..,

" Tu kyu dhundh mujhe...ho rahi  paresan..,mein har kan mein hoon....har jan mein hoon..,

bahar nahi.... tere ander hoon...jisse tu hai anjaan..,aur nahak hi kar rahi...paresan..,

Darr mat mujhse...,prem ke siwa nahi chahiye kuch tujhse...

Sabhi ke jeevan ka mein hi toh aadhar hoon....,tu mujhse hai...mein tujhse hoon...,

Mein hi toh sarvatra sansar  hoon..,

Sirf , Arjun  ka hi  nahi...,tere bhi har yudh ka mein hi toh..... sathi aur saarthi hoon..,"




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