Saturday, February 22, 2020

O kanha...


ओ  कान्हा.......,


जानें क्या सूझी तुझको....प्रीत क्यों जगाई मुझको,


तू भी तो तरपा होगा..... राधे दर्शन को तरसा होगा !


मन बनाकर.....कई दफ़े ख़ुद पर बरसा होगा !!


देख छवि आँखों में तेरी....छलके आँसू पलकों से मेरी,


सुध - बुध सबने खोई...... सुन बाँसुरी की धुन तेरी !!


राधा तेरी जया है .....मीरा अदभुत माया की काया है,


जोगन से जग करे सवाल ..... बता तेरा जहां में कौन है ?


मुस्कुरा कर आज भी ...... कुंज बिहारी खड़े क्यों मौन हैं !!


जग से न अब आशा है.....बदल गयी प्रेम की परिभाषा है,


देखो तो लगता है...... हर तरफ़ चारों धाम लगे हैं ! 


श्याम दिल में नहीं..... ईट की दीवारों में क़ैद घनश्याम पड़े है !!

No comments:

Post a Comment

If you have any doubts let me know.

Recent Post

Ek Shaam......

मन के मरू पर लगा है गिद्धों का पहरा,  दिल की दहलीज़ खुली फिर चमका एक भरम का तारा, जिस्मों के भीड़ में भटक रहा जाने कब से रूह अकेला !! शहरी लिब...

"Feel Love Through Poetry"