Tuesday, February 25, 2020

Zindgi ki tijoriiii...


समेटा बहुत कुछ...... ज़िंदगी की तिज़ोरी में,

आजकल फ़ुर्सत में....संग वक़्त के.....लुटते देखती हूँ !!

हर शह में आज....... महफ़िल लगी !

मुनाफ़ा कम था.....सो नाक़ाम.....मंज़र पे बात चली !!

गुलक यादों के......कितने ख़ुद तोड़ दिए !

अपनें कई रिश्तें ग़ैरों के........ दहलीज़ छोड़ दिए !!

तेज बयार के झोकें.... हक़ीक़त से रूबरू कराते है जब !

हसरतों के हुज़ूम भी.......ख़ामोश बैठ , 


फ़क़त का जश्न..... ख़ुद हि मनाते हैं तब  !!

श्रेष्ठ का प्रमाण..... महफ़ूज़ है तिजोरी में..... इलम हुआ,

परख़ने बैठी जो..... नज़रों से भीड़ भरी...... बाज़ार में !!

आज भी लगता है...... अमीर हूँ...... इस जहां में !

तोड़ ताले..... अक्सर घुसते है...... जब मेरे मकाँ में !!

छत पर पड़ा.....खाली मर्तबान..... बयां करता मेरा क़िस्सा हैं !

क्या कहूँ कि आज मैं....... खुली तिज़ोरी का हिस्सा हूँ !!



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