Tuesday, May 26, 2020

Chalte Chalte.....

बेसबब मंज़िल दूर हुई चलते - चलते, 
ज़रा ठहर तो मांझी..........  
रह न जाए जीवन की साँझ कहीं ढलते - ढलते 
💘💘💘

ज़िंदगी है कुछ भूली, कुछ बिसरी बातें,
चंद पन्नों की सौग़ातें..........   
कितनी किताबें गढ़ी कौन जाने चुपके - चुपके
💝💝💝

हज़ारों किरणें बरसी उजाले की आस में,
मुक़मल दिन होने की चाह में........  
परेशां है सूरज भी रोज निकलते - निकलते
 💖💖💖

सुलगती रेत है पानी की तलाश में,
नखरीली धूप है उदंड........  
कम कर घमंड कह गया बादल आज बरसते - बरसते
💫💫💫

नए मिज़ाज का शहर माना शिक़वे है बहुत,  
मसलें जमीं के है..........
न रख दिल में असर फासले मिटेंगे तभी शहर - शहर
💕💕💕

दुनियाँ के लिए आज मुहाज़िर हूँ सो,  
मायूस भी हूँ ख़ामोश भी हूँ..........
मज़हबी शील देख रुके कदम फ़िर चलते - चलते 
💞💞💞

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