Friday, May 01, 2020

Jeevan - Mrityu......

कारवां सफ़र का,.... कहीं रुका नहीं,

सिलसिला जिंदिगी से,....अभी टूटा नहीं,

रोज़ लेती है जन्म तू..........,

पर दोबारा मिलन का, लेती तू कोई वादा नहीं !!

कहते है ज़िंदगी तू एक कविता है.........,

तो मौत क्या है ?

बोझिल पलकें,......  मंद पड़ती नब्ज़, 

तेज़ धड़कनों के बीच,.....  छूटती साँसें,

सामने बिखरें लम्हें,........ हिलती दीवारों पर लगी तस्वीरें, 

कुछ ख़ौफज़दा चहेरे,..... जिन पर दिखें काल से पहरे,

अनंतकाल से चल रहा,..... जन - जन का यहीं आख़िरी दृश्य हैं,

जिस घर भी,....  सूरज होता अस्त हैं !!

सर्द होंठों में,.....  बची अब नमी नहीं,

ज़िंदगी भर ज़िंदगी से,.... कभी बनी नहीं !!

माना दिख रहा हूँ हीन मैं..........,

.........  ख़ुद के लिए नहीं अपनों के लिए हूँ ग़मगीन मैं,

पर तुझसे हारा नहीं,........ ए मौत तुझसे डरा नहीं हूँ मैं !!

जीवन गर इम्तिहान है,.....  तू उसका परिणाम है,

तुझसे कैसी लड़ाई,.... जो हरेक हिस्सें आई हैं,

तू ईश्वर की आख़िरी कारवाई हैं, यहीं जीवन की सच्चाई हैं !!

जमीं के सितारें तोड़ कर,..... तू आसमां को रौशन करता हैं,

आँसू हमारे सूख चुके,...... तू बादल बन बरसता हैं, 

और हमें कलयुग बासी कहता हैं !!


  

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