ऐसा कोई ज़िंदगी में........पहले तो नहीं था,
इन आँखों का तेरे बिना.......गुज़ारा भी कहाँ था,
देख तुझे अक़्स अक़सर, इश्क़ फ़रमाते हैं,
नज़रों की फ़रमाइश, रूह तक पहुँचाते हैं,
फेरिश्त देख इनकी, फ़रिश्तें भी शरमाते हैं !!
हर बात पे हैरां हूँ , आज इस आइनें से परेशां हूँ,
लेता ये तलाशी है ,पढ़ लेता हर ख़ामोशी हैं,
ख़ुदसे मैं पशेमां हूँ , सूरत से ये मेरी परेशां हैं !!
आसमां ने शामियाने में,..... तारें सज़ा रखें हैं,
ख़्वाबों के आशियानें में लगी, पलकों की पहरेदारी हैं ,
ख़ुदको रोक कर, आईना भी आज तंग हैं,
इन आँखों का तेरे बिना.......गुज़ारा भी कहाँ था,
देख तुझे अक़्स अक़सर, इश्क़ फ़रमाते हैं,
नज़रों की फ़रमाइश, रूह तक पहुँचाते हैं,
फेरिश्त देख इनकी, फ़रिश्तें भी शरमाते हैं !!
हर बात पे हैरां हूँ , आज इस आइनें से परेशां हूँ,
लेता ये तलाशी है ,पढ़ लेता हर ख़ामोशी हैं,
ख़ुदसे मैं पशेमां हूँ , सूरत से ये मेरी परेशां हैं !!
आसमां ने शामियाने में,..... तारें सज़ा रखें हैं,
ख़्वाबों के आशियानें में लगी, पलकों की पहरेदारी हैं ,
ख़ुदको रोक कर, आईना भी आज तंग हैं,
लगा आसमां पे,......जैसे चाँद को ग्रहण हैं !!
उड़ने को है तैयार मन.......पर बंधी इसकी डोर हैं,
बदले पोशाक कई, फ़िर भी लिबाज़ तंग हैं ,
चाहत पे इसके दिल हि नहीं, आईना भी हैरान हैं,
ये दिल से परेशां हैं........ दिल इससे परेशां हैं !!
अँगूठी में पड़ा मीणा नहीं,.....न लगी दीवार का शीशा हूँ ,
तेरी रूह को झाँकता, नित नए क़िरदार में ढालता ,
तेरे ज़मीर पर लगा,.......वो मैं आईना हूँ !!
बदले पोशाक कई, फ़िर भी लिबाज़ तंग हैं ,
चाहत पे इसके दिल हि नहीं, आईना भी हैरान हैं,
ये दिल से परेशां हैं........ दिल इससे परेशां हैं !!
अँगूठी में पड़ा मीणा नहीं,.....न लगी दीवार का शीशा हूँ ,
तेरी रूह को झाँकता, नित नए क़िरदार में ढालता ,
तेरे ज़मीर पर लगा,.......वो मैं आईना हूँ !!

Waah
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