Wednesday, May 06, 2020

Kuch Issh Tarah.....

हक़ीक़त सारे ख़्वाब हो जाते !
किस्मत ने खड़े, अगर फ़साद न होते !!

आता नहीं कुछ भी नज़र !
लगे हो राह में, जब मुश्किलों के शज़र !!

वक़्त ने खड़े किये कई सवाल !
फ़ितरत थी ख़ामोश, फ़िर भी देने पड़े जवाब !!

साँसों से बंधा बोझिल जीवन !
जीना पड़ा, हर तरफ बहती हवा को था यही अभिमान !!

हर सफ़र में मंज़िल का यकीं !
कश्ती तो जीत की लगी, साहिल हार पर मिली !!

चाहा समुद्र को दाएरे में बांधना !
मुश्किल था लहरों के बदले, मिज़ाज को साधना !!

अक्स दिखता नहीं अब भी कहीं !
दूरी दरमियाँ थी हमारे, या लगा आईना हि बेसब्र है अभी !!

तसव्वूर में भी न आया कभी !
आज वो हाज़िर है, माथे की लकीरों में तनाव भी लाज़िम हैं !!









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