Tuesday, July 19, 2022

Aakhri Pal

आखिरी पल........, 

देख रही है नज़रे,.....  आज हर शख्श को ऐसे, 
बरसों की पहचान घुल रही हो,...... इस पल में आज जैसे,
नज़रे उठा सोच रही हूँ.......,  
जाने क्या इस पल में आख़िर ढूँढ रही हूँ !!

क़ायम रिश्ते इस जहाँ के, सब रह जाने यहाँ पे,
फिर भी नज़रे आस में है, जाने किस तलाश में है,
कई मौके ठगा गया हूँ मैं, शायद इसलिए जगा हूँ मैं, 
लगे जख्म गहरे है,..... पर रूहानी है, 
कर्म भुला हूँ,..... पर फल अभी भी बाकि है !!
  
भीड़ की पलकें भी ग़मगीन है, मेरी गुमशुदगी में,
कहती है......,   
कितना रखूँ में हिसाब, इनके गिराए कतरों का, 
मशगूल तो आज,.... जहां भी है, 
सोई धड़कनों को फिर से,..... जगाने में इतना !!
 
आसां नहीं इस जहां से, उस जहां का सफ़र, 
सुना है कभी....,
सुनी राहें.... और सामने खौफ़नाक मंज़र, 
हैरां लगता हूँ,..... थोड़ा परेशां भी दीखता हूँ,
अपने कब्र तक आते हर निशां को,... आज भी पहचानता हूँ !! 

माना......ये राह मैंने चुना नही, 
कोई तलब.... और कहने को कोई तज़ुर्बा नही, 
फिर भी इस दौड़ से कभी थका नही,
अकेला हूँ......, 
पर राही अकेला नही,..... जो इस राह चला हूँ मैं,
बस इसबात पर,......यकीं कर चला हूँ मैं !!
 

No comments:

Post a Comment

If you have any doubts let me know.

Recent Post :-

Sabse Haseen Alfaaz Ho Tum....,

कैसे बताऊ तुम्हें मेरे लिए तुम क्या हो ? 💕 मस्जिद की पहली अज़ान हो तुम,  माँगा जिसे रोज़ दुआओं में हम , रात सिरहाने खुले थे जो ख़्वाब,  उसकी ह...

Most Loved Hindi Poetry :-