Saturday, May 23, 2026

Zara Pass Baitho....,

अरे कहाँ......, 
अफ़रातफ़री में इधर उधर दौड़ रहे,
 
ज़रा पास बैठो......., 
सुन तो लो, हम भी कुछ कह रहे,
 
माना.., वक़्त के बड़े पाबंध हो तुम, 
सुना आजकल कलाई घड़ी में बंद हो तुम,
 
घड़ी तुम्हारे, हर मिनट का हिसाब रखती है, 
क्या..., कैलकुलेटर से ज़िंदगी चलती है,

सुबह से शाम भागते रहते हो तुम, 
कभी काम के पीछे, कभी ज़िम्मेदारियों के नीचे,
 
अपनी हर दौड़ का हिसाब रखते - रखते,
शायद....., मैराथन जीत गए हो तुम,

कभी गौर किया है ?
रात तो वही है, पर आपस में वो बात नहीं,
 
न पहले जैसी बातों पर,आती ये मुस्कान सही,
माना...,वक़्त की तुम्हें बहुत तंगी है,
 
पर ये न भुलो....,
किसी की दुनियाँ के अकेले हक़दार हो तुम,

मंज़िल पाने की होड़ में, 
खो चुके तुम....,खुद को इस भीड़ में,

जिसके साथ था तुम्हें चलना,  
उसे रूककर भी सुनना भूल चुके हो तुम,
  
जो तलाशते है, दुनियाँ में सच्चे रिश्तें,
वो हक़ दे पूछने का मुझे, 
क्या बिखरे मन संभाल सकते हो तुम !!


  
 

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