Saturday, May 09, 2026

Kuch Ankahein Si....,

ए खुदा तेरे इस जहां में, ऐसे  मंजर क्यों है ,

चेहरे तो हँसते, पर छिपे गहरे समंदर क्यों है !!

ये बस बातों का सिलसिला है, कोई वादा तो नहीं,

फिर हर लफ्ज़ में दिखता, सालों का सफ़र क्यों है !!

मासूम दिल में छुपे हैं, अनकहे से अफ़साने,

लब खामोश हैं, मगर ये आँखों में बवंडर क्यों है !!

ना हाथों में हाथ है , ना आँखों से मुलाक़ात,

फिर भी रातों को ,रहता "हम्म " का इंतज़ार क्यों है !! 

कोई पास होकर भी, बहुत दूर सा लगता है, 💑

पर एक अजनबी, लगता दिल के इतना अंदर क्यों है !!

बस दोस्ती की राह पर, हमने बढ़ाए थे कदम,

फिर उसकी हर बात का, होने लगा असर क्यों है !!

कभी कुछ रिश्ते, बिना नाम के भी खास होते हैं,

पर ये बात कहीं आम न हो, लगता फिर इसे डर क्यों है !!

वो कम बोलता है, मगर महसूस हुआ उसे भी है,

उसकी ख़ामोशी में भी, जिक्र ये बार - बार क्यों है !!

ए खुदा, तेरे इस जहाँ में ये मंजर क्यों है,

छोटी बातों का भी होता, इतना असर क्यों है !! 💕💕💕

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