बिन कुछ कहे...... सब कुछ सहे !
लफ्जों की महफ़िल में जो 💬💬💬
कहते - कहते रह गए ..... वो मैं थी !!
गुज़ार दिए..... कई दिन,महीनें और साल 🙇🙇🙇
जो कट ना सकी रात ...... वो मैं थी !!
मुद्द्ते बीती...... सुहाने ख़्वाब देखें 👀👀👀
सोती रातों में जगा बिस्तर जो रस्ता रोकें .....वो मैं थी !!
तेरी ज़मीं पर...... कितने आसमान रहे 💥💥💥
ख़्वाबों की फ़सल जो उगा न सकें .... वो मैं थी !!
भीड़ में तन्हाँ..... ख़ुदको जब भी तुमने पाया 💕💕💕
अपनेपन का एहसास जो संग लाया ..... वो मैं थी !!
मिलते नहीं है अक्स मेरे.... अपनी ही कहानी में 😔😔😔
दास्ताँ तो लिखी तेरी पर ग़ायब है जिसके निशाँ ...... वो मैं थी !!
अफ़वाह से तबियत..... तेरी ख़राब थी !
पूछ - पूछ लोगों ने कर दी खड़ी दीवार थी 💔💔💔
सज़ा -ए -इश्क़ कि क्या अकेली ...... मैं ही हक़दार थी !!

Awesome
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