Thursday, January 26, 2023

Poonam Ka Chaand....

  

क़िस्सा है पूनम की रात का.......,  

तारों के बीच बैठा,एक टुकड़ा चाँद का,

सबकी नज़रों से दूर है वो......,

पास होकर तारों के भी,खुद में मसरूफ है वो,

रोज़ ये आता है,यूहीं घाट लगाता है,

आज क्या बात है....क्या दिन कोई ख़ास है,

कभी आधा,कभी पूरा और आज तो,

पलक झपके बिना कर रहा दीदार वो,

जैसे लगता है धरा पर करने आया,

दिनों बाद फिर से अमृत पान वो....., 

तन्हा सांझ और सुखा कली का हर दुकान,

आँखों की शरा से ज़रा सी टपकी नमी और देखो खिल उठा नमी का चाँद,

चंद टुकड़े इसके,आओं बंज़र जमीं को बाँट दे,हर कली का ये माथा चूमें,इतने दिन जाने विरह के कैसे बीते, 

                          आज इस पल में सब बातों को विराम कर दे,

                       चलों ये रात,जुगनूओं,परो और परिंदों के नाम कर दे......,   



                                                                                                         


                    

 


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