Friday, December 20, 2019

Woh pal...

jane kaha gaye nikal...

ना  जाने  क्यों .....

होता है ये  अकसर , हम  सभी  के साथ....,

चाहिए जिससे उम्र भर का  साथ , पल  में  अचानक उससे  छूट जाता है हाथ ,


ना  जाने क्यों .....

हर  लम्हा याद  आते  है, वो  प्यारे पल ,जो  बीते दोस्तों के संग  ,

पार्क के पेड़ों  के  साथ ,जहाँ होती चाय पर चर्चा, किसकी जोड़ी बनी किसके साथ,


ना जाने क्यों .....

मिल जाए वही फ़ुरसत के दिन ,जब जाड़ों कि सर्द धूप में,छत पर माँ के संग,

बीतते थे ना जाने कितने पहर ,बातों - बातों में कई दफ़े, गालों पर  चपेट भी पड़े,


ना जाने क्यों ....... ये सारे पल चुपके से ,क्यों गए निकल.... 


ना जाने क्यों ......  




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