Friday, December 27, 2019

Tera hi noor hai....


हर तरफ फ़ैला कैसा ये नूर है,.....जो कर रहा खुदको खुदसे हि दूर है,

आज चाँद की चांदिनी भी ख़ूब है,......जो कहने को ये मजबूर है ,

ये बदलते मौसम का फ़ितूर नहीं,.....तेरे इश्क़ का हि तो सुरूर है,

जिसपे चलता नहीं,.....किसीका ज़ोर है !!

इसमें ,ना तेरा,......ना मेरा कसूर है.....मालूम ये सबको जरूर है ,

हो सकता नही जिश्म से रूह जुदा,....जिस दिल का ख़ुदा हो खुद रहनुमाँ ,

गुज़ारिश है इतनी,... ख़ुदा से मेरी, अब ना मंज़र कोई....जुदाई का आये ,

मेरी माँगी, हर दुआ में.....तू ही दुआ बनके आये !!!
              

" होता ये सबको यहाँ जरूर है,...कोई इससे मशहूर है तो कोई नशे में चूर हैं"
   

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