Saturday, January 11, 2020

Talaash mein...


बिना पतझड़ साख़ भी पड़े,... सुने है,


छत पर बैठा काक मौन है,...ये कैसी अनहोनी है !!


दूर गगन में धीमा पड़ा ,...आज सूरज है,


इक प्यासे तुम हि नहीं,...जल की एक बूँद को तरसता वो भी है !!


झुलसा जग का कोना - कोना,... बरस रहे शोले आज,


रात सी फ़ैली इस चादर में,....जुर्म के पाँव,..बाहर है आज !!


दहक उठी धरा भी,... ज़न्नत की तलाश में,


हर गली में छुपा धर्म,... जेहाद के लिबास में !!


दूर नहीं वो दिन जब,....एक तलवार न होगी मयान में,


धर इतने होंगे धरा पर,....की जगह न होगी शमशान में !!


सोचा न था, हालत ऐसी होगी,....साल के शुरुआत में,


खत्म ये रंजो ग़म हो,... हम भी बैठे है इसी इंतज़ार में !!

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