Saturday, January 18, 2020

Maan re.....



ख्वाहिसों के पर लगे है ऐसे,....दूर गगन पतंगों की रेस हो जैसे 💕💕💕


क्यों पल - पल बढ़ती मन की आशा,....चाहे क्यों पूरी हो सब अभिलाषा ♩♩


कितने ख़्वाब अधूरे है,... फिर जगे क्यों इतने खवाहिशे है 💖💖💖


कई दफ़े कहा,....♪♪


रे मन तू इस कदर न चल,.....न कतरो में ख़ुदको जला ♩♩


फिर वही यादों की रात होगी,.....तेरे अरमानों की बात होगी 💕💕💕


ख्वाहिसों के बादल फिर छाएंगे,.....बारिश तो होगी पर तेरे अश्क़ सुख जाएंगे ♩♩


इन सुनी पलकों में भर आया धुँआ,....बंदिशों की धूप में जब से झुलसा है जहां 💘💘💘


मन तू क्यों भागे उसी ओर,....गिरह की डोर उलझी है जिस छोड़ ♩♩


बावरे इस मन की बातें,......कभी बावरे नैन भी समझ न पाए 💝💝💝


सुकून में भी छाई वीरानी है,......तेरी हर ख़्वाहिश पे होती हैरानी है ♩♩


रे मन तू क्यों इस कदर भागे है,......💗💗💗






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