लो फिर आयी......तेरी यादें लगी बढ़ने बेचैनियाँ रातों की,
सुना है मैंने कई किस्से, तेरे मेरे जज़्बातोँ के,
तुम आओ तो तुम्हें कह दूँ, होता नहीं अच्छा
आदत हो गर देर से आने की !!
सच है ये.......सही चाहत हो गर, फ़र्क पड़ता नहीं,
तय किए कितने मिलों का सफ़र,
सुनी पड़ी राहें खोल के बाहें, करें गुज़ारिश बीते
लम्हों को फ़िर से गुजरने की !!
सुन लेती है.........ये अकसर वो सदायें भी
मुमकिन नहीं जिनका, तसव्वुर में आना भी,
लो हुई शाम भी भाड़ी, करवटों में गुज़री रात सारी
सोचूँ जब भी दिल को बहलाने की !!
होता नहीं आसां.......बिखरे अल्फ़ाज़ों को समेटना,
लगे यूँ जैसे पुराने ज़ख्मों को कुरेदना,
रहता है साझे रिश्तों का मर्तबान खाली, है जरुरत
नई यादें फ़िर इक बार सजोने की !!
सुना है मैंने कई किस्से, तेरे मेरे जज़्बातोँ के,
तुम आओ तो तुम्हें कह दूँ, होता नहीं अच्छा
आदत हो गर देर से आने की !!
सच है ये.......सही चाहत हो गर, फ़र्क पड़ता नहीं,
तय किए कितने मिलों का सफ़र,
सुनी पड़ी राहें खोल के बाहें, करें गुज़ारिश बीते
लम्हों को फ़िर से गुजरने की !!
सुन लेती है.........ये अकसर वो सदायें भी
मुमकिन नहीं जिनका, तसव्वुर में आना भी,
लो हुई शाम भी भाड़ी, करवटों में गुज़री रात सारी
सोचूँ जब भी दिल को बहलाने की !!
होता नहीं आसां.......बिखरे अल्फ़ाज़ों को समेटना,
लगे यूँ जैसे पुराने ज़ख्मों को कुरेदना,
रहता है साझे रिश्तों का मर्तबान खाली, है जरुरत
नई यादें फ़िर इक बार सजोने की !!

Very nice
ReplyDeletethanks
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