वहीं पास पड़ा हैं,..... एक डायरी अपना !
ऊपर लिखा था जिसके,....."एक सपना "
अल्फ़ाज़ों में छिपी बैठी ..... सीने की तपिश जहाँ !
बन गयी है आज......ख़लिश की निशानी यहाँ 💗💗
बिसरी रातें,......तेरी पनाह में बीती ....यादें हैं कुछ !
आँखों के पन्ने पलटनें......अक़सर आते हैं सचमूच 💑💑
इक सूखा पत्ता,....पन्ने की ओट लिए पड़ा हैं.....तेरा मेरा नाम जिसमें जड़ा है !
चल तो रही है,...साँसें रेस की तरह.....पर धड़कनें,.....दिल रोके खड़ा है 💕💕
चुराया हर लम्हा,.... दर्ज़ है अश्कों की श्याही से !
कतरन भी बचे है कुछ अरमानों के,.....जो गिरी है घुन लगी दीवारों से 💘💘
देखो तो वक़्त ए इश्क़ ने,.... क्या क्या बदल दिया !
इश्क़ वफ़ा के खेल में......दिल को Almari बदल दिया 💓💓💓

bilkul sahi
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