इस बार थोड़ा जल्दी आना........,
फ़ैली नफ़रत और रंजिश की...... आग,
हर तरफ़ डेरा जमा...... जैसे ज़हरीला नाग,
करना तुझे है...... विष का पान !!!
बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦
खेतों की पगडण्डीओं पर...... बैठा एक मज़दूर
किसान भरनी है..... जिसे बंज़र जमीं की लगान !!!
बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦
रोड़े पड़े है राहों में..... उलझन के..... उनसे भी
दो चार करना....... अपनी मुस्कुराहट से कुछ
सुक़ून के लम्हात भी...... अदा करना !!!
बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦
तन्हां रातों में...... इंतज़ार भड़ी निग़ाहों को,
अपनी लज्ज़त से....... महरूम न करना,
इनकी ख़ैरियत.......भी मालूम करना !!
बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦
कोशिशें बेहिसाब की...... सोए सपनों को जगाने
कि.... अपनी आहटों से...... इनपर भी मद्धम
सी बरसात करना !!!
बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦
हथेलियों को चूम..... बैठ मेरे संग......रात अपनी
बेज़ार करना...... इस सावन सब पावन करना !!!
बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦

suprb
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