Saturday, March 07, 2020

Kaviraaj....ke kai roop


कहते है रवि से भी तेज होती है...... एक कवि की रेस

सच तो ये है, मंजिलों की होड़ में सब गए निकल ,

इश्क़ के राज में, जो गए ठहर.... वो था कवि का शहर !!


परछाई को आईना बना, ख़ुद को सवारते , 

ग़मो को शब्दों से, छंद में ढालते, ज़मीर से अमीर ,

जेब से फ़क़ीर, कहते है सभी..... वो है आज के क़बीर !!


बदहवास ज़िंदगी में , जो जज़्बा न खोए ,

चुप रह कर सुक़ून से, हर मंज़र से करे यारी ,
  
बातों से शेर को ही नहीं, यार को भी करे 

घायल.......  वो है शायर !!


जब भी देश उलझा, राजनीति के मंझधार में , 

कलम को बना पतवार ,छा गए अख़बार में ,

जन -जन ने दिया जिन्हें ,निडर हो सत्य 

कहने का हक़ ..........  वो है लेख़क !!

  
अपने आसूँओं को जिसे,.... पीना आया ,

पाए दर्द पर जिसको,....  हँसना आया ,

कलम को महलम बना, जख्मों पर लिखना आया ,

....... वो ही कविराज कहलाया  !!

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