कहते है रवि से भी तेज होती है...... एक कवि की रेस
सच तो ये है, मंजिलों की होड़ में सब गए निकल ,
इश्क़ के राज में, जो गए ठहर.... वो था कवि का शहर !!
परछाई को आईना बना, ख़ुद को सवारते ,
ग़मो को शब्दों से, छंद में ढालते, ज़मीर से अमीर ,
जेब से फ़क़ीर, कहते है सभी..... वो है आज के क़बीर !!
बदहवास ज़िंदगी में , जो जज़्बा न खोए ,
चुप रह कर सुक़ून से, हर मंज़र से करे यारी ,
बातों से शेर को ही नहीं, यार को भी करे
घायल....... वो है शायर !!
जब भी देश उलझा, राजनीति के मंझधार में ,
कलम को बना पतवार ,छा गए अख़बार में ,
जन -जन ने दिया जिन्हें ,निडर हो सत्य
कहने का हक़ .......... वो है लेख़क !!
जब भी देश उलझा, राजनीति के मंझधार में ,
कलम को बना पतवार ,छा गए अख़बार में ,
जन -जन ने दिया जिन्हें ,निडर हो सत्य
कहने का हक़ .......... वो है लेख़क !!
अपने आसूँओं को जिसे,.... पीना आया ,
पाए दर्द पर जिसको,.... हँसना आया ,
कलम को महलम बना, जख्मों पर लिखना आया ,
पाए दर्द पर जिसको,.... हँसना आया ,
कलम को महलम बना, जख्मों पर लिखना आया ,
....... वो ही कविराज कहलाया !!

waah ji waah
ReplyDeleteBahut khub likhe hai.....
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