Sunday, March 15, 2020

Ankahi khwahishein.....



जीवन के दिखाए मौसमी नज़ारों में 💫💫💫

रूप-रंग कई बदले फिर भी,.......  
                   ....... फिट न बैठी ज़िंदगी के साँचों में,

हर सेकंड यही सोचती रही,........ 
             ......... खोये पल में जाने क्या ढूंढ़ती रही,

सच की गरमाहट से दूर रहीं,........  
        ........ आदत को प्यार समझती रही  !!


काश.......रब के इशारे पहले समझ जाती,

छोटी - छोटी खुशियों के कवर से,

ग़मों को लपेटना सिख जाती,

अँधेरों को छोड़ फिर रोशिनी,

संग दोस्ती हो जाती  !!


काश......  दुनिया के रवैयों से, 

बेमतलब रिवाज़ों से ख़ुद को न जोड़ा होता,

अपनों का संग पाने के लिए ख़ुद का

हिस्सा न छोड़ा होता  !!


काश.......  इश्क़ रब का दिया नायाब 

तौफ़ा है ये दुनिया को समझा पाती,

वफ़ा क्या है ?

बेवफ़ाओं को ख़ुद समझ आ जाती  !!


काश....... ज़िंदगी भी कविता होती 

छोटे - छोटे छंद में सवरी होती, 

जज़्बात की कलम से सजे हर मंज़र होते,

हर पन्ने में ख़ुशी के लगे शज़र होते,

दर्द के हिस्सें सिर्फ़ कोरे पन्ने होते  !!



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