Friday, March 13, 2020

Humare neta.....


हर तरफ़ जले अँगेठियाँ.....,
  
देश को चलाए जब......चंद कुर्सियाँ  !!

ये बनाए नीतियाँ,..... हम भड़े अपनी पुंजियाँ  !!

जब करें चुनावी रैलियाँ......, 

......... आमजन चढ़े मँहगाई की सीढ़ियाँ  !!
   
चाँद से भी बड़े ये नवाब है...... जो दीखते पांच सालों में इकबार है !! 

बड़े शौक़ीन होते इनके मिज़ाज़,..... खाते ये क़बाब और 

हम आँखे मूँद देखते,.... बस ख़्वाब  !!

रात के अँधेरों में भी....... दूर से चमकते हैं ,
  
झूठ के चीथड़ों से......कपड़े सी के जो......पहनते हैं !! 

कुर्सी की मुहब्बत में....... कितने पेड़ काटे हैं ,

गठबंधन की आड़ में ....... कईओं को दिए झाँसे हैं !!

लेके वोट...... देते गला ये घोंट,..... भूख इनकी सिर्फ नोट !!

हमें ये बांट,.....  हमपे ही करे चोट ,

हममें भी है यहीं खोट..... कोसे इन्हें,..... हर रोज़ ,

फ़िर आस जोड़...... इन्हें हि करें वोट !!



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