Monday, March 02, 2020

Baarish.....


इस बार थोड़ा जल्दी आना........,
  
फ़ैली नफ़रत और रंजिश की...... आग, 

हर तरफ़ डेरा जमा...... जैसे ज़हरीला नाग,

करना तुझे है......  विष का पान !!!

बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦

खेतों की पगडण्डीओं पर......  बैठा एक मज़दूर 

किसान भरनी है..... जिसे बंज़र जमीं की लगान !!!

बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦

रोड़े पड़े है राहों में..... उलझन के..... उनसे भी 

दो चार करना....... अपनी मुस्कुराहट से कुछ

सुक़ून के लम्हात भी...... अदा करना !!!

बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦

तन्हां रातों में...... इंतज़ार भड़ी निग़ाहों को,

अपनी लज्ज़त से....... महरूम न करना, 

इनकी ख़ैरियत.......भी मालूम करना !!

बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦

कोशिशें बेहिसाब की...... सोए सपनों को जगाने 

कि.... अपनी आहटों से...... इनपर भी मद्धम

सी बरसात करना  !!!

बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦

हथेलियों को चूम..... बैठ मेरे संग......रात अपनी 

बेज़ार करना...... इस सावन सब पावन करना  !!!

बारिश...... इस बार तू जल्दी आना 💧💦💧💦
  




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