Saturday, May 16, 2026

Jarurat Kya Haii...,

एक अधूरी मोहब्बत की गहरी दास्तान 

तेरी खामोशियों को अब, सुनने की जरुरत क्या है,
दिल से जो उतर गए तुम , तुम्हें बुलाने की, 
जरुरत क्या है !!

जब आसूँ ही बयां कर दे, दिल की हर कहानी,
फिर दर्द को लफ़्जों में, बताने की,
जरुरत क्या है !!

तेरी आँखों में कभी, अपना मुकम्मल जहां देखा था, 
अब किसी और को ख़्वाब में, सजाने की,
जरुरत क्या है !!
 
आज तेरे संग महफ़िल में, कई चेहरे नए रिश्ते है, 
पुराने रिश्तों को फिर, आजमाने की, 
जरुरत क्या है !!

तेरी सुनहरी यादों का रंग, आज भी आँखों में बाकि है,
फिर किसी और शख़्स से, दिल लगाने की,
जरुरत क्या है !!

सीख लिया है अब, बिना मरहम के मैंने जीना,
हर जख़्म ज़माने को, अब दिखाने की, 
जरुरत क्या है !!
   
अगर इश्क़ सच्चा है तो, एक दिन तू लौट आएगा,
हर रोज़ तुझे, पुकारने की, 
जरुरत क्या है !!

मैं आज भी तेरे, इंतज़ार में उस मोड़ पर हूँ, 
किसी और राह पर, अनजान संग जाने की, 
जरुरत क्या है !!



Saturday, May 09, 2026

Kuch Ankahein Si....,

ए खुदा तेरे इस जहां में, ऐसे  मंजर क्यों है ,

चेहरे तो हँसते, पर छिपे गहरे समंदर क्यों है !!

ये बस बातों का सिलसिला है, कोई वादा तो नहीं,

फिर हर लफ्ज़ में दिखता, सालों का सफ़र क्यों है !!

मासूम दिल में छुपे हैं, अनकहे से अफ़साने,

लब खामोश हैं, मगर ये आँखों में बवंडर क्यों है !!

ना हाथों में हाथ है , ना आँखों से मुलाक़ात,

फिर भी रातों को ,रहता "हम्म " का इंतज़ार क्यों है !! 

कोई पास होकर भी, बहुत दूर सा लगता है, 💑

पर एक अजनबी, लगता दिल के इतना अंदर क्यों है !!

बस दोस्ती की राह पर, हमने बढ़ाए थे कदम,

फिर उसकी हर बात का, होने लगा असर क्यों है !!

कभी कुछ रिश्ते, बिना नाम के भी खास होते हैं,

पर ये बात कहीं आम न हो, लगता फिर इसे डर क्यों है !!

वो कम बोलता है, मगर महसूस हुआ उसे भी है,

उसकी ख़ामोशी में भी, जिक्र ये बार - बार क्यों है !!

ए खुदा, तेरे इस जहाँ में ये मंजर क्यों है,

छोटी बातों का भी होता, इतना असर क्यों है !! 💕💕💕

Tuesday, April 28, 2026

Num aakhon ka aasmaan.....,

 
ख़ुदको बचा रखा था जिससे 
वो मंजर आज नग्न आँखों से 
देख रही हूँ !!

धूप भी आज मायूस हो बैठी  
रोशनी चाँद को बिखेरती 
देख रही हूँ !!

टूटा नहीं एक भी तारा
पर आसमां जमीं पर उतरा 
देख रही हूँ !!

ख़ामोशी भरी वो लंबी रातें 
दिल से जो अब करती है बातें  
देख रही हूँ !!  

छुटी नहीं हौसलों की डोरी बस
आँखों की बारिश में थोड़ी गीली 
देख रही हूँ !!

नम आँखों में भी एक चमक है 
टूटकर भी इनमें जीने की ललक है
देख रही हूँ !! 

जो खोया वो किस्मत का हिस्सा 
जो पाया वो मेरा किस्सा बनते 
देख रही हूँ !!

तेरा नाम हवा में घुल सा गया 
हर लम्हा जैसे रुक्सा गया 
देख रही हूँ !!

"कभी कभी आसूँ भी कहानी कहते है 
और वही हमें मजबूत बना देते हैं !! 



Thursday, March 20, 2025

Hamare Beech.......,

वो आई थी पास मेरे 
चंद लम्हें थी साथ मेरे 
हाथों में थे हाथ पड़े  
चुड़ियों में थे जज़्बात सजे,
💑
ख़ामोश सज रहे थे लट 
खुल न रहे थे लब 
जैसे बंधे पड़े थे सारे शब्द,
👫
क्या ऐसा भी हो सकता है 
लबों के साथ - साथ 
शब्द भी सुख सकता है,
👨👩
गुमसुम चुपचाप सी 
ऐसी तो न थी पहले खुशी,
👩
जब तक तेरे संग रहा  
नासमझ बन दर्द में भी सर्द रहा,
💕💕   
पल रही पहलू में जो ख़ामोशी है
किसे कहूँ कौन इसका दोषी है,
💗💗  
आँखें है ये तेरी या आईना   
फितरत साफ - साफ झलकते है 
इनके भी होते अपने करिश्में 
सूरज में भी दीखते आज धब्बे है,
👫
होके भी आज तू संग नही  
हाथ तो है पर साथ नही,
लगता है बुत बनने की आई आज अर्ज़ी है 
और बनके काफ़िर कहते है ख़ुदा की मर्ज़ी है !! 
💔💔💔💔   

Saturday, November 16, 2024

Jaa...Rahi Thi Mein

कितना अलबेला है संसार.......,  

उबड़ खाबड़ पगडण्डियाँ  

शरद से सुखी पड़ी है सारी डंडियाँ,

लो हो गई नए रुत की शुरूवात    

लगने लगी फिर ओसों की कतार !! 

नख सिकोड़ती, हर कदम से जमीं को टटोलती,

अक्स को अपने बूँदों में कहीं तलाशती  देखे  

जा रही थी मैं..........,  

आसमां के नीचे, नन्हीं किरणों से बचते

खुद को आँचल में जमीं के सिमटते देखे 

जा रही थी मैं............,

ये सोंधी मिट्टी की खुश्बू , जिसमें इत्र सा जादू

धीरे धीरे ही सही, अपने नसों में घुलते इसे देखे 

जा रही थी मैं............, 

आँखें खोलूँ या बंद रखूँ या और थोड़ा सब्र रखूँ 

इस बगियाँ में आज भी, खुदको ही अकेला देखे

जा रही थी मैं............., 

लगा हर तरफ है होड़, था मगर ये जज़्बातों का शोर

चाहा बहुत रहूँ बेअसर, फिर भी आ जाते है नज़र ये देखे

जा रही थी मैं.............,  

मिली फुर्सत न मुझे मेरे भँवर से, न जाने कब से इनसे घिरी हूँ, 

साल दर साल परत दर परत, सीलन सी इनमें पड़ी खुद को देखे  

जा रही थी मैं.............,   

💝💝💝

Saturday, July 22, 2023

Jadoo.....

 ऐसा लगता है आजकल.......,                      
                           .......  हम थोड़ा ज्यादा फ़िक्र में रहते है ! 

चलते चलते राहों में अकसर,कदम भी हिचकोले लेते है !!

सुनी राहों में भी अब, कहाँ हम अकेले होते है !!!

👫💖👫

अनसुनी हर आहट भी, अब तेरे आने का जिक्र करती है !

आते - जाते हर निशां को ये, बड़े गौर से देखा करती है !!

झिलमिल ही सही पर इन में, तेरे साथ का वो नज़ारा है !!!

💕💑💕

जो ढलती हर शाम हमने साथ, खुली आँखों से निहारा है !

उन तन्हाँ रातों की बात क्या करुँ, बात पुरानी सी लगती है !!
  
आज तो हर कली कहती कहानी, अपनी सी लगती है !!!

💓👌💗

जुगनुँओं से सजी ये रात, जिसमें तारे भी चमकते है !

दिया बाती है दुल्हा दुलहन आज,तो पतंगें बाराती से लगते है !!

क्या इन्हें तुमने, जमीं से पहले मेरी आँखों में उतारा है !! 

संग मेरे रहे तू ,तेरी फिक्र में मैं,
 
और कुछ न मिले इस जहाँ से.........आज से ये भी गवारा है !!! 

 💝💞💝  
 

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