Friday, January 03, 2020

Tere sheher mein...


क़िस्मत की पेटी बांध,...कुछ अधूरी ख्वाहिशें,

अधूरे ख़्वाब लिये,.....आ गए हम भी,

तेरे शहर में....

आरज़ू है....मशहूर होने की गली - गली में,

आलिशान ना सहि....इक आशिया तो हो,

तेरे शहर में .... 

हर तरफ भीड़ सी है,...लगी यहाँ रेस सी है,

ज़िन्दगी तो है.... बस जीने की कमी सी है,

तेरे शहर में ...... 

बाहर कैसे निकलूँ.....कुछ खोने का भय लगता है,

इस अँधेरी रात में....उजाले से डर लगता है,

       "तेरे शहर में..... गुम हो जाने का डर लगता है"

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