कभी - कभी लगती बेमतलब ,बेबस...... .......बेज़ान सी ज़िंदगी !!
पल - पल लगे काँटों का ......
.......दस्तरख़ान है ज़िंदगी !!
सदियों से जिये जा रहे बेमक़सद से ....... .......बेबाक़ सी ज़िंदगी !!
रहम की उम्मीद किससे करू अपनों से हि...... .......बेज़ार है ज़िंदगी !!
रहम की उम्मीद किससे करू अपनों से हि...... .......बेज़ार है ज़िंदगी !!
तेज़ झोंका नहीं कभी एक शक़ कि फूँक से हि...... ......बिख़र जाती है ज़िंदगी !!
मिली नहीं सदा के लिए तू फिर क्यों हर लम्हें ......
......तन्हाँ कर गई ज़िंदगी !!
धूप भी मायूस पड़ा छत पर किसी बहाने संग ......
.....मुस्कुराया कर ज़िंदगी !!
......तन्हाँ कर गई ज़िंदगी !!
धूप भी मायूस पड़ा छत पर किसी बहाने संग ......
.....मुस्कुराया कर ज़िंदगी !!
होने न दे हौसले का तरकश खाली उम्मीद के तीर से.....
.......भरी है ज़िंदगी !!
.......भरी है ज़िंदगी !!
चेहरें से कितनों के उठने नक़ाब बाकि है कहता हर पैमाना.......
.......अभी हिसाब बाकि है ज़िंदगी !!
.......अभी हिसाब बाकि है ज़िंदगी !!

very true
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