Wednesday, April 01, 2020

Mere Ram.....

उगते सूरज की, किरणों में तू ,
आरंभ भी तू......अंत भी तू  


सुख में भूल, दर्द में जाना जिसे,
नित जग, जिसका नाम भजे,
कहते हैं सब राम उसे........,

तू है गगन से, पाताल तक, 
जीवन थमा, तेरे हि आधार पर,
परचम तेरा, क्षितिज के पार तक,
तू है अल्प से अल्पविराम तक........, 

तेरे इशारे बिन, कुछ चला नहीं, 
धूप छाँव में भी, ढला नही,  
वो सत्य कैसा ?
जिसमें तेरा नाम नहीं........., 

सतरंगी ये दुनियाँ, अपनी आँखें खोले,
हल्की मुस्कान जब, तेरे अधरों को घेरे,
बुझे तारे भी जाग उठे, फ़न जब शेषनाग खोले,
सारा जग जय श्री राम बोले........,

तुलसी कहे........ दूजा न अब कोई राम होगा, 
जिसका अवध में, इतना नाम होगा,
हृदये में लगा, जिसके धाम होगा, 
वहीं बसा श्री राम होगा............., 




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