Friday, May 08, 2020

Jaane doon....

ज़िंदगी क़दमों की दूरियों में सिमटी !
क्या कहे..........,
मिले साये कम, सारी धूप में गुज़री !!
बची जो रौशनी है रखूँ या जाने दूँ..........

चंद ख़्वाब थे जो थे दबे - अनछुये !
क्या कहे..........,
बेफ़िक्र हम घरों में सोये, ख़्वाब गलियों में फिरे !!
देखा जो ख़्वाब था रखूँ या जाने दूँ...........

बोलती रातों में जब चाँद को देखा था !
क्या कहे.........,
उसकी बेवफ़ाई से, इक तारा भी टूटा था !!
माँगी वो दुआ रखूँ या जाने दूँ...........

ख़्वाहिशें हो गई जब जरूरतों से बड़ी !
क्या कहे..........,
महंगी तेरी रूह हो चली, चाहतें जिसमें खो सी गई !!
रूह से तेरे नाता रखूँ या जाने दूँ...........

वो जो भी था तेरे मेरे दरमियाँ !
क्या कहे.........,
जानेमन आँखें तो मिची, पलकें पर खुली रह गई !!
बेचैनी जो हिस्से आई है रखूँ या जाने दूँ..........

पहचानी सी ख़ुश्बू से महका है आज ये जहां !
क्या कहे..........,
बरसी है यादें बूँदें बन, जमी थी बरसों पलकों तले !!
नम जो आँखों है ये रखूँ या जाने दूँ............

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